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मशरूम की खेती का हुनर सीख रहे बंदी

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बिजनौर जिला कारागार में एक जिला एक उत्पाद का बंदियों को प्रशक्षिण देते प्रशिक्षक। - फोटो : BIJNOR
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मशरूम की खेती का हुनर सीख रहे बंदी
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बिजनौर। कभी अपराध करने के बाद जेल तक पहुंचे बंदी अब हुनरमंद बनने जा रहे हैं। जेल में 75 बंदियों को काष्ठ कला, मशरूम का उत्पादन और जैविक खेती की कला सिखलाई जा रही है। इसके लिए बाकायदा 10 दिनों तक चलने वाला प्रशिक्षण भी शुरू हो गया है। प्रशिक्षण लेने के बाद बंदी जेल में रहते हुए भी कमाई कर सकेंगे।
जिला जेल में बंद बंदियों को एक जनपद एक उत्पाद योजना के तहत 10 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है। जिसमें काष्ठ कला में 25 बंदी मशरूम की खेती में 25 और जैविक खेती में 25 बंदियों को शामिल किया गया। 25 बंदियों को काष्ठ कला से संबंधित उत्पादों को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाना है। साथ ही जिला कारागार में बंद 25 बंदियों को जैविक खेती करने के विषय में अवगत कराया जाएगा। इसके अलावा 25 पुरुष एवं महिला बंदियों को मशरूम उत्पादन करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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जिला कारागार में सब्जी उत्पादन पहले से ही होता रहा है लेकिन अब वैज्ञानिक तकनीक से जैविक सब्जियां उगाई जाएंगी। जेल की खपत पूरी होने के बाद जैविक सब्जियों को बाहर बाजार में भी उतारा जाएगा, जिससे बंदियों को भी लाभ मिलेगा। वहीं जेल से रिहा होने के बाद काष्ठ कला का प्रशिक्षण ले रहे बंदी अपना खुद का काम कर सकेंगे। जेल अधीक्षक डॉक्टर अदिति श्रीवास्तव ने बताया कि एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत कारागार प्रशासन भी बंदियों का प्रशिक्षण करा रहा है। जेलर शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण की शुरुआत हो चुकी है। इससे बंदियों के कौशल का भी विकास होगा।
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