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मंडावर : राम नाम गुण गाए सै, भंग पकोड़ी खाए सै

Wed, 01 Mar 2023 11:59 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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-होली के मौके पर देहात क्षेत्र में गूंजने लगे होली के गीत
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आशीष तोमर
मंडावर। मौसम का मिजाज व गांवों में होली के गीत रंगों की होली की उमंग बढ़ा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में राम नाम गुण गाए सै, भंग पकोड़ी खाए सै, हाए पिया तुम नहीं बचोगे, मेरा जिवरा न्यू लरजे आदि होली के गीत, रागनी सुनाई देने लगी है। नई पीढ़ी इन गीतों से अनजान है, बुजुर्गों को आज भी यह कंठस्थ हैं।
होली मृत कड़ियां उत्तर भारत में लोकप्रिय लोकगीत है। इसमें होली खेलने का वर्णन होता है। इसमें देवी देवताओं के होली खेलने से लेकर अलग-अलग शहरों में लोगों के होली खेलने का वर्णन है। इसके अतिरिक्त होली की विभिन्न रस्मों की वर्णन भी होली में मिलता है। जैसे होली के मौके पर गांव में लोग ढोल लेकर लोकगीत गाते हैं। सालमाबाद के बुजुर्ग सोहन सिंह ने बताया कि होली से पहले रोजाना होली के गीत गाए जा रहे हैं। उन्होंने सुनाया कि राजा कारक बढ़ पे चढ़ गया, रानी बार बार बरजे हाए पिया तुम नही बचोगे, मेरा जिवरा न्यू लरजे तीर हजार तुम्हे मंगवा दू, मोसे लेलो दाम सवाए होली ने बड़े बड़े खेल खिलाएं।
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नरदेव सिंह, नरेंद्र सिंह ने सुनाया कि कहें मीर्ग सुनो भाई राजा, मुझे मारकर क्या फल पावें क्यों काया बर्बाद करें, एक नार ऐसी बतलाऊ जीवन भर तू याद करें, मत मारे दर्गन की चोट ओ रसिया, होली में मेरे लग जाएगी। मैं बेटी वृषभान बाबा की और तुम हो नंद के ढोट, मुझको तो लाज बड़े कुल घर की, होली में मेरे लग जाएगी।
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सर्वेंद्र सिंह व आनंद सिंह ने सुनाते हुए कहा कि पहली चोट बचाएं गई कान्हा, कर नैनन की ओट दूजी चोट बचाय गई कान्हा, कर घुघट की ओट, तीजी चोट बचाय गई कान्हा, जहां मिले तुम्हारी जोट ओ रसिया, होली में मेरे लग जाएगी। (संवाद)
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