बिजनौर के बालावाली में गंगा नदी पर बने पुल से गुजरते वाहन।
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भारी ट्रैफिक का बोझ झेल रहा ब्रिटिश कालीन पुल
बिजनौर। ब्रिटिश काल में बना बालावाली का पुल आज भी भारी ट्रैफिक का बोझ झेल रहा है। 1888 में बने इस पुल पर रेल यातायात 22 साल पहले बंद कर दिया गया था। 34 साल पहले मियाद पूरी कर चुके इस पुल पर भारी वाहनों का आवागमन होता रहता है, जो खतरे से खाली नहीं है। हालांकि तीन साल पहले बिजनौर प्रशासन ने अवरोधक लगवा दिए थे, जो अब गायब हैं।
बालावाली में रेलवे का पुराना पुल है। नया पुल बनाने के बाद रेलवे ने इस पुल से ट्रैक उखाड़ लिया और यूपी सरकार को सौंप दिया। जिस पर बाद में उत्तराखंड सरकार ने सड़क बना दी। हरिद्वार और उत्तराखंड को जोड़ने वाले इस पुल की मियाद पूरी होने के कारण भारी और ओवरलोड वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं माना गया था। जिससे हल्के वाहन ही निकाले जा सकते हैं। साल 2019 में बालावाली पुल के पास भारी वाहनों को बंद करने के लिए अवरोधक लगवा दिए थे, जो अब गायब हैं। ऐसे में भारी वाहन बेरोकटोक निकलते हैं।
रेलवे के दस बड़े पुलों में शामिल था यह ब्रिज
देश में रेलवे के दस बड़े पुल हैं। जिनमें बालावाली का पुल भी शामिल था, हालांकि अब यह रेलवे के पास नहीं है। रेलवे ने साल 2000 में नए पुल से ट्रेनों का संचालन चालू कर लिया था। ब्रिटिश काल में जम्मूतवी को कलकत्ता से रेल मार्ग से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर बालावाली में पुल बनाया गया था। जिसके निर्माण पर 27.94 लाख रुपये खर्च हुए थे। इस पुल की मियाद पूरी होने की वजह से बनाए गए नए पुल पर तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी ने साल 2000 रेल यातायात का शुभारंभ किया था।
बालावाली के पुराने पुल से भारी वाहनों की आवाजाही की जांच कर कार्रवाई की जाएगी-मोहित कुमार, एसडीएम सदर