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Bijnor News: बिजनौर-मध्य गंगा नहर परियोजना की लागत को लेकर चल रहा मंथन

Thu, 19 Jan 2023 12:25 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर

सार

-66 किमी है मुख्य मध्य गंगा नहर की लंबाई
-60 किमी है चंदौसी शाखा नहर की लंबाई
-50.8 किमी है बहजोई शाखा नहर की लंबाई
-1065 किमी है नहर की वितरण प्रणाली
- परियोजनो में करीब 1500 पुल और पुलियों का निर्माण भी शामिल
- परियोजना को पूरी करने में अब और कितना होगा होगा खर्च, किया जा रहा आकलन
- परियोजनों के रिवाइज एस्टीमेट पर चल रहा काम, बढ़ सकती है लागत
- अमरोहा और संभल में जमीनों के अधिग्रहण को भी भेजा प्रस्ताव
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मध्य गंगा नहर फेज 2 फाइल फोटो
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विस्तार
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बिजनौर मध्य गंगा नहर परियोजना फेज टू की लागत को लेकर एक बार फिर मंथन चल रहा है। मौजूदा बजट पर्याप्त रहेगा या नहीं, इसका आकलन किया जा रहा है। परियोजना का रिवाइज एस्टीमेट भी प्रस्तुत किया जा सकता है। अमरोहा और संभल में खाली स्थान भरने के लिए जमीनों के अधिग्रहण के लिए भी प्रस्ताव भेजा चुका है।

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बिजनौर बैराज से पानी लेकर मध्य गंगा नहर फेज टू परियोजन अमरोहा, संभल, बहजोई और मुरादाबाद को सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराएगी। इस परियोजना को साल 2007-08 में शुरु किया गया था। बता दें कि इस परियोजना की मुख्य नहर को पूरा कर लिया गया है। शाखा नहर पर भी अधिकांश पूरा हो चुका है। पिछले साल सितंबर के महीने में मुख्य नहर में पानी छोड़ते हुए ट्रायल भी कर लिया गया था। अब परियोजना को अंतिम रूप देने की कवायद चल रही है। हालांकि पिछले एस्टीमेट का बजट अभी खर्च होना बाकी है। फिर भी इस परियोजना को पूरा करने में कितना खर्च होगा और कब तक पूरी हो जाएगी, इस पर मंथन चल रहा है।

चार गुुणा तक बढ़ा बजट
यूं तो मध्य गंगा नहर परियोजना फेज टू समय के साथ साथ बार बार लटकती रही। इसी परियोजना की शुरुआती लागत 1060 करोड़ थी, साल 2016 में पुनरीक्षित बजट 4417 करोड़ रुपया हो गया। मार्च 2021 तक इस परियोजना में 3400 करोड़ रुपया खर्च हो चुका है।

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1850 गांव की जमीनों की सिंचाई करेंगी नहरें
मध्य गंगा नहर निर्माण पूरा होते ही करीब 1850 गांव के खेतों तक नहर का पानी पहुंचेगा। इससे फायदा ये होगा कि किसानों की बिजली और डीजल से सिंचाई पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। अमरोहा के छह ब्लॉक में 59 हजार हेक्टेयर, संभल जनपद में 70 हजार हेक्टेयर और मुरादाबाद के डींगरपुर ब्लॉक में करीब 16 हजार हेक्टेयर की जमीन की सिंचाई हो सकेगी।

पिछले 14 सालों से चल रहा है निर्माण
मध्य गंगा नहर फेज टू परियोजना को साल 2018 में धरातल पर उतारा गया था। तब से लेकर अब तक निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। हालांकि मुख्य नहर पूरी हो चुुकी है, जबकि शाखा नहर का निर्माण भी 90 प्रतिशत तक कर लिया गया है। उधर, रजबहे, अल्पिका और एस्केप आदि का निर्माण अभी तक केवल 80 फीसदी ही हो पाया है।

जमीन की खरीदारी में खर्च हुआ काफी बजट
जमीनों को खरीदने के बाद नहर के निर्माण में सबसे अधिक बजट खर्च हुआ। क्योंकि जब यह परियोजना बनी थी तो सर्किल रेट कम थे, इसके बाद सर्किल रेट बढ़ते रहे और जमीन का खरीदना सिंचाई विभाग के लिए काफी महंगा साबित हुआ। साथ ही समय के साथ महंगाई भी बढ़ी है।

अधिग्रहण के लिए भेजे गए प्रस्ताव
जिन किसानों ने सिंचाई विभाग को जमीन के बैनामे नहीं किए हैं, उनकी जमीनों को अधिग्रहण करने का भी प्रयास किया जा रहा है। जिसके चलते संभल में 17.65 हेक्टेयर और अमरोहा में 60 हेक्टेयर के लिए अधिग्रहण का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा गया है।

 मुख्य नहर का निर्माण पूरा कर लिया गया है। शाखा नहर भी लगभग बन चुकी है। इसके अलावा रजबहों आदि का निर्माण में जहां खाली स्थान बचा हुआ है, वहां जमीनों का अधिग्रहण किया जाना है। अमरोहा और संभल में अधिग्रहण के लिए प्रशासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। इसके अलावा रिवाइज एस्टीमेट पर काम चल रहा है - बीएस चाहर, अधिशासी अभियंता, मध्य गंगा नहर निर्माण खंड पांच
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