1850 गांव की जमीनों की सिंचाई करेंगी नहरें
मध्य गंगा नहर निर्माण पूरा होते ही करीब 1850 गांव के खेतों तक नहर का पानी पहुंचेगा। इससे फायदा ये होगा कि किसानों की बिजली और डीजल से सिंचाई पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। अमरोहा के छह ब्लॉक में 59 हजार हेक्टेयर, संभल जनपद में 70 हजार हेक्टेयर और मुरादाबाद के डींगरपुर ब्लॉक में करीब 16 हजार हेक्टेयर की जमीन की सिंचाई हो सकेगी।
पिछले 14 सालों से चल रहा है निर्माण
मध्य गंगा नहर फेज टू परियोजना को साल 2018 में धरातल पर उतारा गया था। तब से लेकर अब तक निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। हालांकि मुख्य नहर पूरी हो चुुकी है, जबकि शाखा नहर का निर्माण भी 90 प्रतिशत तक कर लिया गया है। उधर, रजबहे, अल्पिका और एस्केप आदि का निर्माण अभी तक केवल 80 फीसदी ही हो पाया है।
जमीन की खरीदारी में खर्च हुआ काफी बजट
जमीनों को खरीदने के बाद नहर के निर्माण में सबसे अधिक बजट खर्च हुआ। क्योंकि जब यह परियोजना बनी थी तो सर्किल रेट कम थे, इसके बाद सर्किल रेट बढ़ते रहे और जमीन का खरीदना सिंचाई विभाग के लिए काफी महंगा साबित हुआ। साथ ही समय के साथ महंगाई भी बढ़ी है।
अधिग्रहण के लिए भेजे गए प्रस्ताव
जिन किसानों ने सिंचाई विभाग को जमीन के बैनामे नहीं किए हैं, उनकी जमीनों को अधिग्रहण करने का भी प्रयास किया जा रहा है। जिसके चलते संभल में 17.65 हेक्टेयर और अमरोहा में 60 हेक्टेयर के लिए अधिग्रहण का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा गया है।
मुख्य नहर का निर्माण पूरा कर लिया गया है। शाखा नहर भी लगभग बन चुकी है। इसके अलावा रजबहों आदि का निर्माण में जहां खाली स्थान बचा हुआ है, वहां जमीनों का अधिग्रहण किया जाना है। अमरोहा और संभल में अधिग्रहण के लिए प्रशासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। इसके अलावा रिवाइज एस्टीमेट पर काम चल रहा है - बीएस चाहर, अधिशासी अभियंता, मध्य गंगा नहर निर्माण खंड पांच