बिजनौर जिले में धरती की कोख पोषक तत्वों से खाली होती जा रही है। जीवांश, पोटाश, नाइट्रोजन, फास्फोरस, आयरन, आदि पोषक तत्व जिले की मिट्टी से कम होते जा रहे हैं। किसान भी पोषक तत्वों के बारे में जागरूक नहीं हो रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो एक दिन बिजनौर की धरती बंजर भी हो सकती है। किसानों ने मिट्टी का उपचार नहीं किया तो ये हालात जल्दी पैदा हो सकते हैं।
खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज जमीन की उर्वरकता है। जमीन के उर्वरक न होने पर खेत बंजर हो जाएंगे। किसान खेतों में खड़ी फसल में पेस्टीसाइट का अंधाधुंध इस्तेमाल करते आ रहे हैं। लेकिन जमीन की उर्वरकता पर ध्यान नहीं देते। जमीन की उर्वरकता कम होने का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी छाया हुआ है। किसी जिंदा शरीर की तरह खेत की मिट्टी में भी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। जमीन की जांच करा कर कम मिले पोषक तत्वों को डालकर उसकी ताकत दोबारा बढ़ाई जा सकती है। मिट्टी की सेहत यानि उसमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा को जानने के लिए कृषि विभाग की ओर से मृदा स्वास्थ्य कार्ड अभियान चलाया गया है। इस जांच में जिले की जमीन में जिंक, मैगनीश, आयरन, नाइट्रोजन, फास्फोरस आदि तत्वों की कमी पाई जा रही है। पोषक तत्व ही फसलों के विकास में मुख्य भूमिका निभाते हैं। अगर किसान इस पर ध्यान नहीं देंगे तो जमीन से ये पोषक तत्व बिल्कुल खत्म हो जाएंगे और फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा। मृदा परीक्षण अभियान में जिले में अब तक 11758 ग्रिड की जांच की गई। ढाई हेक्टेअर जमीन को एक ग्रिड माना गया। इनकी जांच में पोषक तत्वों की भारी कमी मिली है।
ऐसे करें पोषक तत्वों की पूर्ति
पोषक तत्वों की कमी को हरी खाद, कंपोस्ट खाद, गोबर वाले खाद, मिल की खली की खाद, हड्डी के चूरे व जैविक खाद से पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा अलग-अलग पोषक तत्वों के अलग-अलग खाद भी बाजार में उपलब्ध हैं। जिले के किसान फसल चक्र नहीं अपना रहे हैं। किसान एक ही तरह की फसल के पीछे पड़े रहते हैं। ऐसे में फसलों में एक ही तरह के पोषक तत्वों की कमी आ जाती है। उपनिदेशक कृषि जेपी चौधरी के मुताबिक मिट्टी के सैंपलों की जांच में पोषक तत्वों की कमी मिली है। इस संबंध में रिपोर्ट कार्ड किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को अपनी जमीन के पोषक तत्वों के बारे में पता कर उनकी उपलब्धता पूरी करनी चाहिए।
ब्लॉक सैंपल जीवांश पोटाश नाइट्रोजन फास्फोरस
देवमल 1208 न्यून मध्यम अति न्यून अति न्यून
हल्दौर 1269 न्यून मध्यम अति न्यून अति न्यून
जलीलपुर 1197 न्यून मध्यम अति न्यून अति न्यून
नूरपुर 1530 न्यून मध्यम अति न्यून अति न्यून
धामपुर 755 न्यून मध्यम अति न्यून अति न्यून
स्योहारा 704 न्यून मध्यम न्यून अति न्यून
नहटौर 262 न्यून मध्यम न्यून अति न्यून
नजीबाबाद 1433 न्यून मध्यम अति न्यून अति न्यून
किरतपुर 639 न्यून मध्यम अति न्यून अति न्यून
कोतवाली 1447 न्यून मध्यम अति न्यून अति न्यून
अफजलगढ़ 1314 न्यून मध्यम अति न्यून अति न्यून
नोट: यह आंकड़े मृदा परीक्षण लैब से लिए गए हैं। पोषक तत्वों की कमी करीब 40 प्रतिशत सैंपल में पाई गई है।