24 अप्रैल को नंदकिशोर का शव गांव सरवनपुर में सड़क किनारे पड़ा मिला था
एक ही युवती से प्रेम प्रसंग के विवाद में विकास और उसके चचेरे भाई ने की थी हत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम अवतार यादव ने नंदकिशोर हत्याकांड में दोषी पाते हुए विकास और उसके चचेरे भाई अमन को आजीवन कारावास एवं 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि में से आधी राशि नंदकिशोर की पत्नी को क्षति पूर्ति के रूप में दी जाएगी। यह हत्या एक ही युवती से प्रेम प्रसंग के विवाद में की गई थी।
शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र पाल राजपूत के अनुसार 23 अप्रैल 2023 को थाना नगीना के गांव काजी वाला निवासी नंदकिशोर दिन में 11 बजे अपनी मोटरसाइकिल से नगीना जाने को कहकर गया था। रात तक घर नहीं लौटा। 24 अप्रैल को उसकी लाश गांव सरवनपुर में सड़क किनारे पड़ी मिली। भाई इंद्रदेव ने थाना नजीबाबाद में अज्ञात के विरुद्ध हत्या मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस विवेचना में यह बात सामने आई की नंदकिशोर उर्फ बिट्टू का प्रेम प्रसंग अपने गांव के ही दीपचंद की लड़की शालिनी उर्फ पारुल से था। विकास का भी संबंध शालिनी उर्फ पारुल से था। नंदकिशोर ने इस बात की शिकायत शालिनी से की। विकास और उसका चचेरा भाई अमन नंदकिशोर से रंजिश रखने लगे। उसे जान से मारने की धमकी दी। 23 अप्रैल को विकास ने नंदकिशोर को फोन करके बुलाया।
इस पर नंदकिशोर विकास के पास गया। तब विकास और अमन ने उसकी बेरहमी से हत्या कर उसका शव सरवनपुर ईश्वरी अस्पताल के पास फेंक दिया। विवेचक राधेश्याम ने 25 अप्रैल को विकास को गिरफ्तार किया और उसके बैग से मृतक का टूटा हुआ मोबाइल बरामद किया। अमन के पास से हत्या में प्रयुक्त दराती, संबल, पलटा बरामद किया गया। कोर्ट ने इस मामले में विकास एवं अमन निवासी गांव तकीपुर नरोत्तम उर्फ धरमपुरा को नंदकिशोर की हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
एक वर्ष एक माह 22 दिन में आया निर्णय
बिजनौर। नंदकिशोर हत्याकांड में एक वर्ष एक माह 22 दिन के अंदर निर्णय सुनाया गया। इस मामले में तुरंत विवेचना कर विवेचक राधेश्याम ने कोर्ट में चार्ज सीट दाखिल की। कोर्ट ने पांच जुलाई 2023 को दोनों आरोपियों विकास व अमन के विरुद्ध चार्ज आरोपित किया। आरोपियों ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की पर हाईकोर्ट ने इस मामले में जमानत नहीं दी। दिन प्रतिदिन सुनवाई के आदेश दिए। पांच जुलाई 2023 को चार्ज बनने के बाद 11 माह 19 दिन बाद फैसला आ गया।