बिजनौर में एसीजेएम अभिनव यादव ने 2012 के विधानसभा चुनाव में चुनाव अचार संहिता के उल्लघंन का आरोप सिद्ध न होने पर पूर्व विधायक वीपी सिंह को बरी कर दिया है।
अधिवक्ता मनु प्रताप सिंह के अनुसार थाना नूरपुर के थानाध्यक्ष सुबोध सक्सेना ने चुनाव आयोग के द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन और प्रत्याशियों द्वारा चुनाव अचार संहिता के उल्लघंन की शिकायतों की 20 जनवरी 2012 को जांच की। उन्होंने पाया कि बसपा के प्रत्याशी के रूप में वीपी सिंह द्वारा कार्यालय स्थापित किया गया था। उस कार्यालय में आयोग द्वारा निर्धारित संख्या से अधिक झंडे, बैनर, पोस्टर लगे हुए थे। इसकी वीडियोग्राफी कराकर उन्हें कब्जे में लिया गया। इस घटना की रिपोर्ट थाना नूरपुर में दर्ज कराई गई थी।
वीपी सिंह का कहना था कि उन्होंने 2012 में बसपा प्रत्याशी के रूप में नूरपुर विधानसभा से कोई चुनाव नहीं लड़ा। बसपा के प्रत्याशी मोहम्मद उसमान थे। इस मामले में उनकी छवि धूमिल करने के लिए झूठा फंसाया गया है।
अधिवक्ता मनु प्रताप सिंह के अनुसार इस मामले में पुलिस वीपी सिंह के खिलाफ कोई साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत नहीं कर पाई। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि अभियोजन ऐसा कोई तथ्य साबित नहीं कर पाया है, जिससे आम जन जीवन की असुविधा उत्पन्न हुई हो या आचारसंहिता का उल्लंघन हुआ हो। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए पूर्व विधायक वीपी सिंह को धारा 188 आईपीसी व धारा 127 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के आरोप से दोष मुक्त कर दिया है।