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Bijnor News: हो जाएं सावधान, पांच दिन बाद फिर शिकार पर निकलेगा नरभक्षी गुलदार

Thu, 03 Aug 2023 12:30 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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रजनीश त्यागी
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बिजनौर। नरभक्षी गुलदार का व्यवहार इंसानी खून और मांस चखने के बाद सामान्य से ज्यादा बदल जाता है। जहां सामान्य गुलदार इंसानों से डरते हैं, वहीं नरभक्षी गुलदार इंसानों को भोजन के तौर पर देखने लगते हैं। नरभक्षी होने के बाद इनके व्यवहार में आया परिवर्तन ही इन्हें पकड़ने में सबसे बड़ी बाधा बन जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो शिकार को मारकर खा ले तो वह अपना ठिकाना बदल देता है। साथ ही दस से 15 किलोमीटर की दूरी तक वह घूमता है। सिकंदरपुर की घटना के बाद अब विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि आठ किलोमीटर के दायरे में चार से पांच दिन के भीतर वह अपना अगला शिकार कर सकता है।
भले ही नरभक्षी की तलाश में तमाम विशेषज्ञ और वन विभाग की टीम लगी है, लेकिन गुलदार का बदलता व्यवहार उसे तलाशने में सबसे बड़ी बाधा बन गया है। जिम कार्बेट के रिसर्च स्कॉलर और वन्य जीव व्यवहार के विशेषज्ञ जोएल लायल कहते हैं कि गुलदार को समय मिले तो वह सात से आठ किलोग्राम तक मांस खा जाता है। ऐसी स्थिति में वह पांच दिन तक बिना शिकार के भी रह सकता है और इस दौरान अपने छिपने की जगह तलाशता है। उसका व्यवहार बदल जाता है, जहां सामान्य तौर पर वह इंसानों से डरता है तो नरभक्षी होने के बाद उन्हें भोजन मानने लगता है। उसकी यही फितरत इंसानों के लिए खतरा बन जाती है। अगले पांच दिन में फिर से भूख लगने पर दस किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाले गांव में वह अगला शिकार कर सकता है।
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अकेले जंगल जाना, मतलब जान देना
भले ही नरभक्षी इंसानों पर हमला करता है, लेकिन वह भीड़ से डरता है। इसलिए अकेले जंगल जाना खुद की जान देना है। इसलिए गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को अकेले नहीं जाना चाहिए। अकेले व्यक्ति को घात लगाकर गुलदार हमला कर देता है। वन्य जीव विशेषज्ञ जोएल लायल कहते हैं कि नरभक्षी को पकड़ने या मारने के लिए सटीक रणनीति की जरूरत है। उसके पगचिह्न तलाशकर उसका पीछा किया जाए। इसके बाद करीब पांच किलोमीटर के दायरे में उसकी संभावित मौजूदगी वाले स्थानों पर पिंजरे लगाए जाएं तो उसे पकड़ा जा सकता है। ऐसे में नरभक्षी के छिपने की आदत बाधा बनेगी, लेकिन तीसरे से पांचवें दिन के बीच सबसे ज्यादा अलर्ट रहने की आवश्यकता होगी।
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गुलदार से बचने को इन नियमों को अपनाएं

क्या करें

- खेतों में दाे या उससे अधिक के समूह में जाएं

- गन्ना काटने से पहले वन्य जीव भगाने के लिए हांका करें

- खेत में मोबाइल या रेडियो पर तेज आवाज में गाने चलाएं

- काम करते समय एक व्यक्ति को निगरानी के लिए लगाएं

- खेतों में काम करते समय सिर पर हेलमेट या नकपैड पहनें

- अधिक रात में खेतों पर न जाएं, खेतों की निगरानी मचान से करें

- वन्य जीव दिखने पर वन अधिकारियों को तुरंत सूचना दें

यह न करने की दी गई सलाह

- खेतों पर अकेले न जाएं, छोटे बच्चों को अकेले न भेजें

- गन्ने की कटाई बैठकर या झुककर न करें

- खेतों की रखवाली करते समय भूमि या चारपाई पर न सोएं

- वन्य जीव दिखने पर उसे न छेड़े और उसके रास्ते में न आएं


आंकड़ों पर नजर

- 04 हाथी कर रहे जिले में गुलदार की तलाश
- 100 से ज्यादा वनकर्मी और विशेषज्ञ तलाश में जुटे
- 17 जुलाई से अब तक चार जान ले चुका गुलदार
- 02 ड्रोन भी गुलदार की तलाश में जुटे

सात माह में गुलदार के हमने में 13 मौत

- 17 फरवरी 23 को नगीना के गांव किरतपुर में किशोरी अदिति को मारा

- 4 मार्च 23 नहटौर के गांव बल्लाशेरपुर में मासूम पूर्वी को मारा



- 18 मार्च 23 नगीना के गांव काजीवाला में मिथिलेश को मारा

- 19 अप्रैल 23 को अफजलगढ़ के गांव सीरवासचंद में तुंगल सैनी को मारा



- 23 अप्रैल 23 की रात रेहड़ के गांव उदयपुर चांदपुर में मासूम अर्शी को घर से उठाकर मार डाला

- 25 अप्रैल रेहड़ के गांव मूसापुर में खुशी छह वर्ष को ले गया और मार डाला



- 26 अप्रैल सुबह घूमने निकले युवक राहुल को मारा

- 21 जून को अफजलगढ़ के गांव मोहम्मदपुर राजौरी निवासी कमलेश देवी को उत्तराखंड की सीमा में मारा



- 22 जून रेहड़ के गांव मच्छमार में गुलदार ने हमला कर दस वर्षीय बच्चे को मारा

- 17 जुलाई को कोतवाली देहात गांव मखवाड़ा में महिला गुड्डी को मारा



- 27 जुलाई को गांव तेलीपुरा में युवक 18 वर्षीय संदीप को मार डाला

- 30 जुलाई को रेहड़ थाना क्षेत्र के ग्राम भटपुरा में बनैली नदी के पास जमना देवी 19 वर्ष को मार डाला
- 02 अगस्त को सिंकदरपुर में जंगल गए एक व्यक्ति को मार डाला, उसका मांस भी खा गया

एक गड्डी घास का लालच ले गया मौत के मुंह में
बरूकी। ब्रह्मपाल को एक गड्डी घास का लालच मौत के मुंह तक ले गया। पशुओं के लिए चारा लाने की फिक्र में वह यह भी भूल गए कि जंगल में मौत मंडरा रही है। ब्रह्मपाल बुधवार की सुबह करीब सात बजे अपने खेतों पर पशुओं के लिए घास लेने गए थे। वह अकेले ही चारा काट रहे थे। करीब 10 बजे वे एक गड्डी घास लेकर घर आ गए, लेकिन उस समय आसमान में बादल छाए थे और हवा में भी थोड़ी ठंडक थी। ब्रह्मपाल को लगा कि मौसम ठीक है और अभी दोपहर भी नहीं हुई है। वह दोबारा एक और गड्डी घास लेने खेतों पर पहुंच गए। दोपहर जब वे घर नहीं लौटे तो घरवालों को चिंता हुई। दोपहर बाद घर के लोग उन्हें तलाशने निकल गए। खेत पर उनकी शर्ट पड़ी मिली, जिस पर खून लगा था। आसपास तलाशते समय करीब 200 मीटर दूरी पर ब्रह्मपाल का खाया हुआ शव पड़ा मिला। गुलदार ब्रह्मपाल को खींचकर वहां ले गया था।
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