अतिक्रमण से संकरी हुई बान नदी
बान नदी पर लंबे समय तक ध्यान नहीं दिया गया। यही कारण है कि कभी नदी के रूप में बहने वाली बान नदी आज नाले के रूप में सिमटकर रह गई है। कागजों की बात करें तो बान की चौड़ाई दस से 15 मीटर तक है, लेकिन मौके पर इस समय एक या दो मीटर तक भी सिमट चुकी है।
प्राकृतिक श्रोत थे बान नदी के पानी का श्रोत
नजीबाबाद के पास बान नदी का उद्गम माना जाता है, ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसा यहां क्या था कि पांच दशक पहले यह 12 महीने बहती थी। इसका जबाव भी उसके आसपास की भागौलिक स्थिति में छिपा हुआ है। इस क्षेत्र में दो से तीन दशक पहले तक पानी के प्राकृतिक श्रोत फूटते थे। उद्गम स्थल के पास एक बड़ा तालाब भी था। इसमें भी प्राकृतिक श्रोत से पानी आने के कारण पानी बाहर आता और बान में चला था। आसपास का पानी भी इसी नदी से होता हुआ आगे बढ़ता था।
हम बान नदी को पुनर्जीवित करने के लिए योजना तैयार कर रहे हैं। जल्द ही बान पर निरीक्षण किया जाएगा और उस पर काम शुरू कराया जाएगा। बान नदी में फिर से जलधारा वापिस लौटाने का लक्ष्य लिया गया है। ताकि यह अपने पुराने स्वरूप में लौट सके। उमेश मिश्रा, डीएम बिजनौर