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दशहरा पर बिना मुहूर्त के भी होते हैं शुभ कार्य

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दशहरा पर बिना मुहूर्त के भी होते हैं शुभ कार्य
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बिजनौर। दशहरा पर्व अश्विनी मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार पांच अक्टूबर को दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है। दशहरा के पर्व पर शुभ कार्य बिना शुभ मुहूर्त देखे किए जा सकते हैं। विजयादशमी पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 7:44 मिनट से 9:13 मिनट तक है। इसके बाद 10:41 मिनट से 2:09 मिनट तक रहेगा।
अश्विनी मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भगवान राम ने रावण का वध किया था। देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के बाद महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। दशहरा वर्ष की तीन अत्यंत शुभ तिथियों में से एक है। अन्य दो चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा तिथि हैं। दशहरा पर्व पर पूजन के समय शस्त्रों की पूजा भी जाएगी। मान्यता है कि इस दिन जो कार्य शुरू किया जाता है, उसमें विजय प्राप्त होती है। दशमी तिथि चार अक्टूबर को दोपहर 2:20 मिनट से शुरू होकर पांच अक्टूबर को दोपहर 12 बजे तक रहेगी। यह पर्व किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। इस समय किसान अपने खेत में सुनहरी फसल उगाकर अनाज रूपी संपत्ति घर लाता है। दशहरा के दिन भगवान श्रीराम का विधिवत पूजन करना चाहिए।
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दशहरा पर करें इस मंत्र का जाप
ओम दशरथाय विद्महे, सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो राम: प्रचोदयात ।
मिलती है पापों के परित्याग की प्रेरणा : पंडित ललित शर्मा
सिविल लाइन स्थित धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा ने बताया कि दशहरा का पर्व दस प्रकार के पाप काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।
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शमी के पेड़ की पूजा का विधान : पंडित विकास शर्मा
पंडित विकास शर्मा ने बताया कि विजयादशमी पर शमी के पेड़ की पूजा का विधान होता है। विजयादशमी पर रावण का पुतला जलाकर दशहरे का उत्सव धर्म की रक्षा, शक्ति का प्रदर्शन और शक्ति का समन्वय का प्रतीक है।
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