जै दिन जेठ चले पुरवाई, तै दिन सावन सूखा जाई...
बिजनौर। जै दिन जेठ चले पुरवाई, तै दिन सावन सूखा जाई। मौसम के महाकवि घाघ यह कहावत इस बार बिल्कुल सटीक साबित हो रही है। बिजनौर में जेठ के महीने में आठ दिन पुरवा हवा चली थी। ऐसे में सावन में कम बारिश की आशंका से लोगों के फसल को नुकसान होने की आशंका से किसान परेशान हैं। वहीं वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधे भी सूखने लगे हैं। सावन के चार दिन लगभग सूखे ही निकल चुके हैं। सोमवार की शाम हल्की बूंदाबांदी हुई तो बारिश की उम्मीद बनी, लेकिन कुछ ही देर बाद बादल छंट गए और उमस और ज्यादा बढ़ गई।
जिले में लोग बारिश के लिए तरस गए हैं। मगर बारिश नहीं पड़ रही है। 15 जुलाई से सावन की शुरूआत हो गई है। बादल रोज उठते हैं, कहीं हल्की बूंदाबांदी होती है तो कहीं कुछ हवा के झोंके ही चलकर रह जाते हैं। नगीना मौसम वेधशाला के अनुसार जुलाई तक 82.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। बारिश न पड़ने से किसानों की फसल सूखने लगी है। जेठ में जितने दिन पुरावा हवा चलती है, सावन में उतने दिन सूखे जाते हैं। घाघ की इस कहावत सही साबित होती नजर आ रही हैै।
बारिश की आस में पौधरोपण, सूखे पौधों की जगह लगेंगे दूसरे पौधे
बरसात के मौसम में ही पौधरोपण किया जाता है, लेकिन इस बार पौधरोपण में लगाए गए बहुत बड़ी संख्या में पौधे भी सूख गए हैं। वन विभाग भी मौसम की मार के आगे बेबस नजर आ रहा है। वन अधिकारियों का कहना है कि बरसात में इसलिए पौधे लगाए जाते हैं, ताकि पौधे एक बरसात में जड़ पकड़ लें। मगर इस बार बारिश न होने से पौधे भी सूख गए हैं। जिसके चलते अब वन विभाग सूखे हुए पौधों की जगह दोबारा पौधरोपण करने की तैयारी कर रहा है।
लग चुके हैं 45 लाख से ज्यादा पौधे
वन विभाग ने पांच जुलाई को जिलेभर में पौधरोपण कराया था। इस दिन 45 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। पौधरोपण अभियान करीब तीन दिन चला और जिलेभर में 45 लाख से ज्यादा पौधे लगाए गए। इसमें रामपुर ठकरा के जंगल में दुष्यंत वन में करीब 16 हजार से ज्यादा पौधे लगे थे। इसके अलावा शकुंतला वन, भरत वन, विदुर वाटिका में भी आठ-आठ हजार पौधे लगाए गए। रामपुर ठकरा में लगाए गए पौधों की पत्तियां गर्मी में पानी न मिलने से सूख गई।
जहां सूख गए, वहां लगाएंगे नए पौधे : डीएफओ
डीएफओ डॉ.अनिल पटेल ने बताया कि वन क्षेत्रों में जहां भी पौधरोपण हुआ है, वहां जहां भी संभव हो रहा है, पानी की व्यवस्था कराई जा रही है। बारिश की उम्मीद थी, बारिश न होने से कुछ जगहों पर पौधे सूखने की सूचनाएं मिली हैं। जो पौधे सूख गए हैं, वहां बारिश होने पर नए पौधे लगवाएं गए हैं। कुछ पौधे ऐसे हैं, जिनकी पत्तियां शुरू में सूख जाती है। बारिश में वह हरे हो जाएंगे।