-तीन माह की एडवांस ले रहे स्कूल फीस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। नया शैक्षिक सत्र शुरू होते ही अभिभावकों का बजट गड़बड़ा गया है। काफी निजी विद्यालय संचालक मासिक फीस में बिल्डिंग, कंप्यूटर फीस आदि विलय कर ली है। विद्यालय संचालक तीन माह की फीस पहले ही ले रहे हैं। फीस जमा करने में देरी होने पर अभिभावकों से विलंब शुल्क लिया जाता है। अभिभावकों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था व शिक्षा के स्तर में सुधार लाकर और वह अभिभावकों का विश्वास जीत लें, निश्चित ही निजी स्कूलों पर असर आएगा।
एक अप्रैल से नया सत्र शुरु हो गया है। परीक्षा परिणाम के बाद छात्र अगली कक्षाओं में पहुंच गए है। वैसे तो विद्यालयों ने स्कूलों में कक्षावार कोर्स के लेखकों के नाम लिख दिए हैं। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल एडवोकेट का कहना है कि सरकार व प्रशासन को फीस बढ़ोत्तरी, कोर्स आदि मामले में स्वयं संज्ञान लेना चाहिए। स्कूलों व दुकानों पर पहुंचकर बारीकी से जांच करें। इससे अभिभावकों को जरूर राहत मिलेगी। देरी से फीस जमा करने पर विलंब शुल्क अदा करना पड़ता है, एडवांस में कोई राहत नहीं है। विद्यालयों ने पिछले साल की सापेक्ष इस बार लगभग बीस प्रतिशत दाम बढ़ा दिए हैं। निजी विद्यालय अभिभावकों मनमाने ढंग से रुपये प्राप्त कर रहे हैं। अधिकारी भी इस ओर कुछ करने से बच रहे हैं।
बोले अभिभावक
बच्चों की पढ़ाई का बजट बनाया गया था। नए सत्र आरंभ होने पर महंगा कोर्स और तीन माह की महंगी एडवांस फीस घर के बजट को गड़बड़ा रही है। फीस में देरी होने पर विलंब शुल्क जमा करना पड़ता है।
प्रेमा श्रीवास्तव, गृहणी
शासन व प्रशासन को निजी विद्यालयों पर अंकुश लगाने के ठोस कदम उठाने चाहिए। निजी स्कूलों में योग्य शिक्षक है, लेकिन शिक्षा का स्तर सही नहीं होने से अभिभावक निजी की ओर बढ़ रहे हैं। सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता बढ़ाकर वह अभिभावकों का विश्वास जीते।
सीमा भारती, अभिभावक
बोले अधिकारी
एक दुकान से कोर्स आदि सामान खरीदने के कोई विद्यालय अभिभावकों पर दबाव नहीं बना सकता है। यदि कहीं किसी अभिभावक के साथ ऐसा हो रहा है। तो शिकायत मिलने पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-रामाज्ञा कुमार, डीआईओएस