पुल को सड़क से जोड़े रखने के तमाम प्रयास रहे नाकाम
बिजनौर। गंगा पर पुल का निर्माण हुआ तो लोगों को सफर के सुगम हो जाने की आस जगी लेकिन गंगा की तेज धारा ने पुल को सड़क से अलग कर दिया। पुल को पहुंच मार्ग से जोड़े रखने के लिए तमाम प्रयास नाकाम हो गए। सड़क बचाने को पत्थर डाले गए, आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की सलाह पर भी काम किया। परंतु पानी के कटान से सड़क पुल से दूर होती चली गई। अब पुल से आवागमन बंद है। शायद पानी कम होने के बाद ही सड़क का फिर से निर्माण किया जाएगा।
30 जुलाई को गंगा उफान पर आई तो धारा ने रुख बदला। गंगा की धारा पुल के पहुंच मार्ग से जा टकराई। जिसके चलते 30 जुलाई को पहुंच मार्ग कट गया था, उसी दिन आवागमन भी बंद कर दिया। इसके बाद महीनों तक सड़क को बचाने के प्रयास चलते रहे। लेकिन सड़क लगतार कटती रही। अब करीब 80 मीटर तक सड़क कट चुकी है। सड़क की जगह भी पानी बह रहा है। और पुल सड़क से अलग थलग है।
उद्घाटन के बिना ही चालू हो गया था पुल
चांदपुर। मेरठ से उत्तराखंड क्षेत्र को जोड़ने के लिए हस्तिनापुर जलीलपुर के बीच नारनौर गंगा पर पुल का निर्माण किया गया था। जिसका उद्घाटन भी नहीं हो पाया था कि करीब ढाई माह पूर्व नारनौर गंगा पर बने पुल की अप्रोच सड़क धराशायी होकर पानी में समा गई थी। ढाई माह से पुुल पर आवागमन बंद था। गंगा पार मेरठ क्षेत्र के अनेक शिक्षक व कर्मचारी चांदपुर जलीलपुर क्षेत्र में सेवारत हैं। पुल की अप्रोच सड़क टूटने के बाद रास्ता कम होने के कारण शिक्षक, कर्मचारी, किसान मजदूर, व्यवसायी व आमजन नाव का सहारा लिए हुए थे। नाव के सहारे ही गंगा पार कर अपने काम पर आ जा रहे थे।
नाव में सवार होकर ही गंगा पार करते हैं लोग
चांदपुर। हस्तिनापुर क्षेत्र से चांदपुर क्षेत्र के रायपुर, हरिनगर, रूस्तमपुर ढाकी, गंधौर आदि व अमरोहा आदि क्षेत्रों में शिक्षक, कर्मचारी, व्यवसायी व आमजन का आवागमन रहता है। पुल की अप्रोच सड़क टूटने से बाद बिजनौर की ओर से होकर आने मे समय व आर्थिक बोझ बढ़ता था। जिसके चलते लोगों ने नाव को ही अपना सहारा बना रखा था। जब से पुल पर ट्रैफिक बंद हुए है तभी से नाव का संचालन किया जा रहा है।
भीड़ होनेे पर नाव में सवार नहीं हुए कई लोग
नाव में सवारी अधिक हो जाने व जगह दिखाई नहीं देने से काफी यात्री गंगा पार करने से रह गए थे। गंगा घाट पर ही दूसरी नाव से जाने की प्रतिक्षा कर रहे थे। जिससे वे हादसे के शिकार होने से बच गए।
मौके पर पहुंचा चांदपुर क्षेत्र का प्रशासन
नाव पलटने की सूचना पर एसडीएम मांगरोम चौहान, सीओ सुनीता दहिया, थाना प्रभारी सतीश कुमार राय अपनी फोर्स के साथ मौके पहुंच गए। घटना का जायजा लिया तथा फोन के माध्यम से व्यवस्था बनवाने का प्रयास किया। मौके पर मोटर वाट लेकर पहुंची पीएसी ने गंगा में मोटर वोट उतारकर नाव यात्रियों की तलाश शुरू कर दी थी।
बिना किसी सुरक्षा के चल रही थीं नाव
गांववासियों के मुताबिक बिना किसी सुरक्षा के गंगा में नाव का संचालन हो रहा था। लोगों का कहना है कि गंगा में पांच नाव व एक मोटर नाव का संचालन हो रहा था। काफी लोगों का आवागमन नाव द्वारा चल रहा था।
नाव यात्रियों की संख्या को लेकर बना रहा असमंजस
गंगा नाव डूबने के बाद से समाचार दिए जाने तक नाव सवार यात्रियों की संख्या को लेकर असमंजस बना हुआ हैं। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों अनुसार अब तक 12 लोगों के नाम सामने आए हैं जो बचा लिए गए हैं। एक शिक्षक महेश पाल लापता हैं। जबकि गंगा पुल के निकट खड़े लोगों के अनुसार नाव में 22 लोग सवार थे। लापता लोगों की संख्या को लेकर भी असमंजस बना हुआ हैं।
यदि सही हो गई होती अप्रोच सड़क तो नहीं होता हादसा-
करीब ढाई माह पूर्व धराशायी हुई अप्रोच सड़क को अधिकारियों ने शीघ्र सड़क ठीक कराने का दावा किया था। मगर पुल व सड़क की दूरी बढ़ती रही। तेज बहाव से लोक निर्माण विभाग के इंतजाम बहते रहे। हारकर लोक निर्माण विभाग ने आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की भी सलाह ली थी। सड़क के कटाव वाले स्थान पर बोल्डर की क्रेट वाल बनाकर कटान को रोक लिया गया। मगर सड़क बनाने का कोई कार्य नहीं हुआ।