बिजनौर। यूपी बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। यदि विद्यार्थी पिछले साल कम दिन स्कूल गया है तो उसे अपनी यह आदत बदलनी होगी। विद्यार्थियों को कक्षा में बंक मारना अगली कक्षा में दाखिले के लिए भारी पड़ सकता है। क्योंकि अब विद्यार्थी को दाखिले के लिए दो दर्जन से अधिक जानकारी देनी होगी। तथ्यों के छुपाने से नुकसान हो सकता है।
माध्यमिक शिक्षा में सुधार के लिए कई फैसले हुए हैं। व्यवस्था को तकनीकी बनाया गया। इसके बाद भी दाखिलों में कथित हेराफेरी होने के आरोप लगते रहे। इस पर दाखिलों पर शिकंजा कसा गया है। शासन की मंशा है कि विद्यालयों में शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई हो। विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़े। इसके लिए माध्यमिक विद्यालयों में दाखिलों के लिए आवेदन प्रारूप निर्धारण किया गया है।
आवेदन पत्र में विद्यार्थी, विद्यार्थी के माता-पिता, अभिभावक के बारे में विभिन्न जानकारियां देने की व्यवस्था है। विद्यार्थियों को पिछली कक्षाओं की पढ़ाई का विवरण देना होगा। इतना ही नहीं विद्यार्थियों को यह भी बताना होगा कि वह पिछले शिक्षा सत्र में कितने दिन स्कूल गया व कितने दिन अनुपस्थित रहा। पिछली कक्षा में बड़ी संख्या में गैरहाजिरी विद्यार्थी के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
- ये हैं कुछ मुख्य जानकारी
यूपी बोर्ड माध्यमिक विद्यालयों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को छात्र छात्रा का नाम, माता-पिता का नाम, माता-पिता अभिभावक का आधार नंबर, दिव्यांगता का प्रकार, राशनकार्ड का प्रकार, माता-पिता की शैक्षिक योग्यता, पिछला परीक्षाफल, पिछले शिक्षा सत्र में स्कूल जाने के दिनों की संख्या, बैंक खाता, लिंक खाता संख्या, बैंक का आईएफएससी संख्या, आधार में दर्ज मोबाइल फोन नंबर आदि दो दर्जन से अधिक जानकारी देनी होगी। बताया गया कि विद्यालयों को दाखिले के लिए आवेदन प्रारूप प्राप्त हो गया है। डीआईओएस कार्यालय का कहना है कि शासन से शिक्षा में सुधार के लिए दाखिले के लिए गाइडलाइंस आती है।