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नियमों का जाल ही बन रहा जंजाल

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नियमों का जाल ही बन रहा जंजाल
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बिजनौर। आयुष्मान भारत योजना का लाभ ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है। इसका कारण नियम है। साल 2011 के बाद जिन महिलाओं की शादी हुई, उनमें ज्यादातर को आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिला महिला अस्पताल में जनवरी से जून तक 1850 महिलाओं का प्रसव हुआ। इनमें से कुल 47 महिलाओं की ही आयुष्मान कार्ड के तहत डिलीवरी हुई।
आयुष्मान भारत योजना का लाभ 2011 में हुई जनगणना के अनुसार दिया जा रहा है। आर्थिक जनगणना के आधार पर महिलाओं को योजना में शामिल किया गया था। 2011 के बाद जिन महिलाओं की शादी हुई, उन्हें आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शादी के बाद महिला के गांव, पिता के नाम की जगह पति का नाम हो जाता है। यहीं कारण है कि जब महिला डिलीवरी के अस्पताल में जाती हैं तो लाभार्थियों की लिस्ट में नाम खोजने पर ज्यादातर महिलाओं का नाम नहीं मिलता है। सरकारी अस्पताल में तो आयुष्मान कार्ड न होने पर भी इलाज फ्री में हो रहा है, लेकिन प्राइवेट अस्पताल में आयुष्मान कार्ड न होने से डिलीवरी का पूरा खर्च मरीज से लिया जा रहा है। नियमों के फेर में फंसकर गर्भवती महिलाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं महिला अस्पताल में आयुष्मान कार्ड का काम देखने वाले युधिष्ठिर ने बताया कि गर्भवती महिलाएं डिलीवरी के समय मैरिज सर्टिफिकेट भी नहीं होता है, जिससे उन्हें लाभ मिल सके। मैरिज सर्टिफिकेट होने पर पुरानी लिस्ट के आधार पर कार्ड बनाया जा सकता है।
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सब को मिलता है मुफ्त इलाज : सीएमएस
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. प्रभा रानी ने बताया कि सरकारी अस्पताल में तो गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी करने का कोई चार्ज नहीं लिया जाता है। इसलिए महिलाएं अपना कार्ड नहीं दिखाती हैं। कुछ महिलाएं आयुष्मान कार्ड दिखा देती हैं।
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लिस्ट में नाम है तो बनाया जाएगा कार्ड : सीएमओ
सीएमओ डॉ. विजय कुमार गोयल ने बताया कि जिन महिलाओं का आयुष्मान भारत योजना की लिस्ट में नाम है, उन महिलाओं का कार्ड बनाया जाएगा। अगर लिस्ट में नाम नहीं है तो उसे आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं मिल सकता।
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