गोवंश को निराश्रित छोड़ने वाले लोगों के लिए पेश कर रहे नई मिसाल
47 गोआश्रय स्थल हैं जनपद बिजनौर में
8063 गोवंशीय पशु हैं इनमें संरक्षित
894 पशु दिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना में
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जनपद में बेसहारा पशुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है और यह किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। वहीं जिले में 894 ग्रामीण ऐसे भी हैं जो अपने घरों पर गोवंशों की सेवा कर रहे हैं और गोवंशों को निराश्रित छोड़ने वालों के लिए मिसाल बने हैं।
जनपद ही नहीं पश्चिम उत्तर प्रदेश में बेसहारा गोवंश किसानों के लिए बड़ी समस्या है। यह बेसहारा पशु किसानों को फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। खेतों खड़ी गेहूं की फसल को बेसहारा पशु हानि पहुंचा रहे हैं। कई किसानों ने खेतों की जुताई कर दी। शासन व प्रशासन ने जनपद में गोशालाओं की स्थापना की। जिले की समस्त प्रकार की 47 गौ आश्रय स्थलों में 8063 गोवंश संरक्षित कर रखे हैं। इसके बाद काफी संख्या में बेसहारा पशु खेतों में एवं सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं। शासन की मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत जनपद के करीब 894 पशुपालक कान्हा बनकर गोवंश की सेवा कर रहे हैं। शासन व पशुपालन विभाग से उन्हें तीस रुपये प्रतिदिन के हिसाब से चारे आदि के लिए धनराशि मिलती है।
-बोले अफसर
इच्छुक व्यक्ति मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत गोवंश को पालने के लिए दिए जाते हैं। उन्हें शासन से तीस रुपये प्रतिशत चारा आदि के लिए मिलेगा। पशुपालक को गोवंश लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
-डॉ. मुकेश गुप्ता, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी।