बिजनौर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश तिवारी ने हाथी को मारने के मामले में चारों आरोपियों की जमानत याचिका निरस्त कर दी है। जिला शासकीय अधिवक्ता महफूज चौधरी के अनुसार 26 मार्च को थाना बढ़ापुर में वन विभाग के अमित कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया था कि जब वे बढ़ापुर रेंज में गश्त पर थे तो हाथी के शव का एक अवशेष पड़ा मिला था। इस मामले में जांच में कुछ भी सामने न आने पर फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी। बाद में पुलिस व वन विभाग ने हाथी की हत्या का खुलासा करते हुए चार लोगों को पावर कटर के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपी गांव रामजीवाला के रहने वाले मोहम्मद असलम, शौकत अली, विरासत अली व नासिर को पुलिस ने पकड़ा था। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हाथी के शव के बाकी अवशेष बरामद किए थे। आरोपियों ने बताया था कि हाथियों का एक झुंड उनकी फसल को नुकसान पहुंचाने के लिए खेत में घूस गया था। उन्होंने झुंड को बाहर निकाल दिया। असलम की लाइसेंसी बंदूक से गोली मार दी। हाथी की मौत हो गई। सबूत मिटाने के लिए उन्होंने हाथी के शव के पावर कटर से कई टुकड़े कर दिए। कुछ टुकड़े जमीन में दबा दिए तो कुछ इधर उधर फेंक दिए। जिला जज ने हाथी की हत्या को गंभीर अपराध मानते हुए चारों आरोपियों की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।