बिजनौर। जिले का पारा बुधवार को 43 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। धूप से धरती तपने लगी और करीब 18 किलोमीटर तेजी से चल रही लू के थपेड़े लोगों को झुलसा रहे थे। भीषण गर्मी, लोडिंग से आबादी ही नहीं बिजलीघरों में रखे ट्रांसफार्मर भी धधक गए। जिले में इस साल 80 ट्रांसफार्मर फुंक चुके है। लोड बढ़ने से बिजली आपूर्ति के दौरान ट्रिपिंग बढ़ रही है।
शहर की आबादी तेजी से बढ़ रही है। नए परिसीमन उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ी, लेकिन बिजलीघर वहीं क्षमता व संख्या में रहे। इस कारण गर्मी में लोड से ट्रांसफार्मर धधक रहे हैं। पिछले साल के सापेक्ष इस बार गर्मी के दिनों से पहले योजना के तहत ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई, लंबी लाइनों फीडर को छोटा और लाइनों के जर्जर तार बदले गए। यहीं कारण है कि पिछले साल के सापेक्ष इस साल कम ट्रांसफार्मर फुंके।
गत साल जून माह में 311 ट्रांसफार्मर और इस बार अभी तक 80 ट्रांसफार्मर फुंके हैं। अफसरों के अनुसार इनकी रिपेयरिंग में करीब तीस लाख रुपये खर्च आया होगा।
इतने फुंके विद्युत ट्रांसफार्मर
बिजनौर डिवीजन प्रथम क्षेत्र में 13 ट्रांसफार्मर 100 केवीए से कम, बिजनौर डिवीजन द्वितीय में 11 ट्रांसफार्मर 100 केवीए से कम, 03 ट्रांसफार्मर 100 केवीए से ज्यादा क्षमता वाले फुंके। चांदपुर डिवीजन प्रथम में 18 ट्रांसफार्मर 100 केवीए से कम, एक 100 केवीए क्षमता, चांदपुर डिवीजन द्वितीय के क्षेत्र में 31 ट्रांसफार्मर 100 केवीए से कम और तीन ट्रांसफार्मर 100 केवीए से ज्यादा क्षमता के फुंके।
200 वोल्टेज पहुंची रही उपभोक्ताओं के यहां
भीषण गर्मी में बिजली की मांग बढ़ रही है। खपत और मांग में अंतर आने से बिजली आपूर्ति के दौरान लो-वोल्टेज की समस्या उत्पन्न होती है। ग्रामीण क्षेत्र हो या शहर सभी जगह कटौती का ग्राफ बढ़ रहा है। बिजली आपूर्ति के दौरान 440 की जगह बिजली लाइन में 200 वोल्टेज आ रहे हैं।
ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि हुई। जर्जर तार भी बदले गए। शेड्यूल से आपूर्ति दी जा रही । फील्ड स्टाफ, जेई, एसडीओ सभी ट्रांसफार्मरों की निगरानी करते हैं। कहीं ट्रांसफार्मरों में तेल निकलने आदि की समस्या होती है। वहीं सही कराएं जा रहे हैं। -अजय कुमार कैम, अधिशासी अभियंता विद्युत