सैदनगली। नबी के नवासे हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद मे छह मुहर्रम को मजलिसों का सिलसिला जारी रहा। इमाम बारगाहों के अलावा सादात के घरों में भी मजलिसे हुईं, जिनमें नसीमुल हसन, सफदर अली, मास्टर नईमूल हसन, डॉ. लईक हैदर ने मर्सिये पढ़े। जबकि मजलिस को सादिक रजा, हसन मेहंदी ने खिताब किया। मरहूम मेहंदी अब्बास के मकान पर मजलिस हुई। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत बरामद हुआ, जो जुलूस की शक्ल मे इमाम बारगाह फातेमा दख्खन पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस में नोहे मुहम्मद अब्बास, एजाज मुर्तजा, हैदर अब्बास, सुहैल अब्बास आदि ने पढ़े। रात को मजलिस इमामबारगाह दादे वाले में हुई, इसके बाद मुहम्मद अब्बास के मकान से हजरत अली असग़र का झूला बरामद हुआ। दूसरी मजलिस पीर जी वाले इमामबारगाह मे हुई, जिसे मौलाना मोहसिन तकवी ने खिताब करते हुए कहा कि कर्बला के मैदान में सबसे बड़ी शहादत अली असगर की है क्योंकि ये बच्चा उम्र में सबसे छोटा था। सिर्फ 6 महीने के अली असगर को इमाम हुसैन खुद अपने हाथों में लेकर जालिमों के सामने गए और कहा यजीदी फौज अगर तुम्हारी नजर में मैं गुनहगार हूं तो इस मासूम बच्चे ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है। इसकी मां का दूध खुश्क हो चुका है इसे थोड़ा सा पानी पिला दो। जालिमों को इस नन्हे बच्चे पर कोई रहम नहीं आया। हुरमला ने तीर चलाया जिसने असगर के गले को छेद और अली असगर की शहादत हो गई। बशीर की शहादत सुनकर अजादार फफक कर रोये। इस मौके पर मजहर अहसन, कसीम मुजतबा, इमरान मुर्तजा, जमाल हैदर, अली मेहंदी, हसन इकबाल, नजफ अब्बास, काशिफ मुर्तजा, इमरान मुजाहिद, हसन रजा आदि मौजूद रहे।