- 1964 से 68 के बाद बिजनौर पालिका चुनाव में दूसरा जाट प्रत्याशी
- नए परिसीमन के बाद बदले बिजनौर नगर पालिका के चुनावी समीकरण
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। नए परिसीमन के बाद बिजनौर नगर पालिका के चुनावी समीकरण बदल गए। नया क्षेत्र जुड़ने से जाट समाज के मत बढ़ गए। शहर में जाट समाज के ज्यादा वोट होने के कारण भाजपा ने जाट प्रत्याशी इंदिरा सिंह पत्नी डॉ. बीरबल सिंह पर दांव खेल दिया। बिजनौर पालिका के चुनाव में करीब 59 साल बाद दूसरा जाट प्रत्याशी चुनावी मैदान में आया है। 1964 से 1968 में बिजनौर पालिका के अध्यक्ष स्वर्गीय चौधरी नेपाल सिंह आर्य रहे हैं।
बिजनौर नगर पालिका के इतिहास के पन्ने पलटे तो यहां भी एक रिकार्ड नजर आया। पुराने परिसीमन पर सन 1964 से 67 तक नगर पालिका बिजनौर पर जाट नेता स्वर्गीय नेपाल सिंह आर्य चेयरमैन रहे। इस सीट पर उन्होंने दो बार कब्जा किया। यह जानकारी देते हुए उनके बेटे विजयदीप सिंह बबलू ने बताया कि उस समय जाट, मुस्लिम व अन्य समाज के लोगों ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ाया था। इस सीट पर ज्यादातर मुस्लिमों और वैश्य समाज के लोगों का ज्यादा कब्जा रहा है। नए परिसीमन से जातीय समीकरण बदल गए। नए परिसीमन में हिंदू मतदाताओं में से जाट समाज के वोट बहुत हो गए हैं। राजनीतिक पार्टियों के जानकारों के माने तो नए परिसीमन से जातीय समीकरण का योग ऐसा बना की पार्टी ने इस बार जाट समाज के प्रत्याशी को चुनाव में उतार दिया।
इंदिरा सिंह के ससुर रहे विधायक, पिता रहे एमएलसी
बिजनौर नगर पालिका की भाजपा प्रत्याशी इंदिरा सिंह का मायका व ससुराल का राजनीतिक पृष्ट भूमि रही है। उनके ससुर स्वर्गीय बाबूराम पाल सिंह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की भारतीय क्रांतिदल बीकेडी 1969 से बिजनौर सीट से विधायक चुने गए थे। वह जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन तथा जिला पंचायत अध्यक्ष व कई बार ब्लॉक प्रमुख रहे हैं। इंदिरा सिंह के पिता स्वर्गीय बाबूराम पाल सिंह भी एमएलसी और जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन तथा ब्लाॅक प्रमुख भी रहे हैं। प्रत्याशी इंदिरा सिंह के पति डॉ. बीरबल सिंह भी राजनीति से जुड़े हुए हैं।