बिजनौर। जिले के 42 पंचायतों के सचिवों पर गाज गिरी। पंचायत सचिवों के विकास कार्य समीक्षा में आधे अधूरे मिले। पंचायत सचिवों की कथित लापरवाही सामने आई है। जिस पर सभी पंचायत सचिवों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। साथ ही आरोपियों का जनवरी माह का वेतन रोक दिया गया है।
शासन से मुख्यमंत्री के प्राथमिकता वाले विकास कार्य तय है। डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार डीएम उमेश मिश्रा पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों को समय से पूरा करने को लेकर सख्त है। जिले में 1123 ग्राम पंचायत हैं। सभी पंचायत सचिवों को मुख्यमंत्री के प्राथमिकता वाले विकास कार्य को 15 जनवरी तक पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। डीपीआरओ के मुताबिक पंचायतों में जाकर विकास कार्यों की हकीकत परखी गई। समीक्षा के बाद यह बात सामने आई है कि 42 पंचायतों में पंचायत भवन तथा सामुदायिक शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। बैठकों में बार बार कहे जाने की बाद भी पंचायत सचिवों के कान पर जूं नहीं रेंगी। आरोप है कि इससे पंचायत सचिवों की कथित लापरवाही दिखाई पड़ती है। इसलिए 26 ग्राम पंचायत अधिकारी व 16 ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई है।
पैसे में गड़बड़ी की आशंका, पत्रावली तलब
शासन से पंचायतों को विकास कार्यों के कराने के लिए खूब पैसा आवंटित हुआ है। डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार कतिपय ग्राम पंचायतों का मौका जांच करने के बाद विकास कार्य को आवंटित धन में गड़बड़ी की आशंका है। इसलिए इन पंचायतों में अब तक कराए गए विकास कार्यों एवं खर्च किए गए पैसे की पत्रावली तलब की गई है। सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी को कहा गया है कि वह पत्रावलियों की गहनता से जांच करें। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि यदि कहीं वित्तीय अनियमितता मिली तो दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।