उझारी। मुहर्रम की पहली तारीख पर उझारी के मोहल्ला सादात में मजलिसों का सिलसिला और बढ़ गया है। इमामबाड़ा बाबुल हवाईज और अबू तालिब में नोहा ख्वानी जुगनू ने की। मरसिया ख्वानी जीशान हैदर और उनके हमनवाओं ने की। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मुहर्रम अली ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने हक व इंसाफ की खातिर यजीद के आतंक को मिटाने की खातिर शहादत को अच्छा समझा। लेकिन जुल्म के आगे सर नहीं झुकाया। इस मौके पर भारी तादाद में अजादार मौजूद रहे।