बिजनौर। एक तरफ जहां मानसून की दस्तक कभी भी हो सकती है, वहीं दूसरी ओर नदियों के किनारे बसे गांवाें के लोगों की धड़कन बढ़ने लगी है। हर साल दावे होते हैं, इंतजाम की बात कही जाती है, लेकिन बाढ़ जमकर तबाही मचाती है। इस बार भी 31 गांव में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इनमें 22 संवेदनशील और 09 अतिसंवेदनशील श्रेणी में हैं।
पहाड़ों पर बारिश होने लगी है। कुछ ही दिन में मानसून भी पहुंच जाएगा, जिसके बाद सभी प्राकृतिक नदियों का जलस्तर बढ़ जाएगा। जिले में बात करें तो गंगा, रामगंगा, खो नदी समेत 16 प्राकृतिक नदियां है। इसमें गंगा, रामगंगा, खो नदी काफी कटान करती है। पिछले कई सालों से गंगा में गौसपुर का कटान चिंता का विषय बन गया था। हालांकि इस बार वहां बंदा बनने और बाढ़ रोधी कार्य होने से बाढ़ कटान न होने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं गलखा देवी मंदिर को भी बचाने की बात हो रही है।
यदि इतिहास पर नजर डाली जाए तो गंगा से बिजनौर और चांदपुर तहसील सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। यहां के एक या दो नहीं बल्कि 23 गांव अब तक गंगा में समा चुके हैं। लोगों ने आबाद गांव में खुद अपने हाथों से घरों को तोड़कर मलबा बचाया था। दस साल पुरानी बात करें तो सीमलाकलां और फतेहपुर सभाचंद यह दो गांव ऐसे हैं, जो सबसे आखिर में गंगा की रेती में खो गए।
ऐसी नदियां, जिनमें हर साल आती है बाढ़
जिले में पहाड़ों से उतरकर पहली बार मैदान में आने वाली करीब 16 नदियां हैंं। बरसात में मैदान के अलावा पहाड़ों पर भी बारिश होने से गंगा मालन, खो, गागन, रामगंगा, बनौली, रतनाल, कोटावाली, ऊनी, नकटा, गूला, फीका, धारा, पीली, लकड़ियान और बान नदी में का जलस्तर बढ़ जाता है।
इन गांवों में रहता है बाढ़ का प्रकोप
यूं तो 31 गांवों को संवेदनशील और अति संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों की सूची काफी लंबी है। इनमें धामपुर तहसील के गांव तिपरजोत, मुकरपुरी, नंदगा, सिपाहीवाला, बेरखेड़ा, कोपा, धुराहरा, मंधौरा, नाथोड़ोई समेत 29 गांवों में बाढ़ का खतरा बना रहता है। बिजनौर तहसील के गांव इच्छावाला, भगवतीपुर, लाडपुर, लतीफपुर, मुर्सफाबाद, हिम्मतपुर बेला, रामसहायवाला, बालावाली, सुक्खापुर, कुंदनपुर टीप, फतेहपुर सभाचंद, सीमली कोहरपुर, राजारामपुर, डैबलगढ़, रावली, बाकरपुर और यूसुफपुर बाढ़ झेलते हैं। नजीबाबाद तहसील के गौसपुर, वीरुवाला, ताहरपुर, छोटी भूडी, पुंडरी कला, खैरूल्लापुर, कछियाना में बाढ़ आती है। नगीना तहसील के 11 गांव और चांदपुर तहसील के करीब बीस गांव भी बाढ़ से प्रभावित रहते हैं।
ऐसे गांव, जिनकी मिट गया अस्तित्व
पिछले दो दशकों की बात करें तो बिजनौर तहसील के ही गांव मतवाली, सौपुरी, भगवतीपुर, इच्छावाला, मुर्शदाबाद, मोहनपुर भी गंगा की तेज धारा में बह गए। भगवतीपुर, इंच्छावाला, मुर्शदाबाद आदि आधा दर्जन गांव धारा के उस पार चले गए और अब गैर आबाद हैं। साल 2001 में भी जनपद का गांव सुक्खापुर भी पानी में बह गया। तत्कालीन डीएम ने सुक्खापुर के ग्रामीणों को नए स्थान पर बसाया, तो ग्रामीणों ने गांव का नाम भी डीएम के नाम पर ‘मार्कंडेपुरम’ रखा था। इससे पहले
साल 1957 में चांदपुर तहसील का गांव नांदनौर गंगा में बह गया था। इस गांव को खानपुर में आबाद किया गया था। इसके बाद चांदपुर तहसील के गांव जाफराबाद और जहांगीरपुर गांव भी गंगा में जलसमाधि ले चुके थे। इसके बाद वर्ष 1964 में आई गंगा की बाढ़ में विदुरकुटी के सामने आबाद गांव भुआ, बेला, शेरपुर, लीलावली, हरिपुर, श्रीजीपुर, गांवड़ी, खेड़ा, धूधली खादर गंगा में डूब गए थे।
बाढ़ से निपटने के इंतजाम किए जा रहे हैं। बाढ़ चौकियां, बाढ़ आश्रय स्थल, कंट्रोल रूप स्थापित किए जा रहे हैं। यदि कहीं बाढ़ की स्थिति बनती है तो तुरंत सहायता के लिए टीमों का गठन भी किया जा रहा है। - अरविंद कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व