‘करबला इंसान को सिखाती है जीने का सलीका’
बिजनौर। मोहर्रम की इमामबाड़ में आयोजित इब्तेदायी मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अजहर अब्बास ने कहा कि करबला इंसान को जीने का सलीका सिखाती है।
मौलाना अजहर अब्बास ने कहा कि करबला हमे जुल्म से नफरत और मजलूम से मोहब्बत करने का पैगाम देती है। नफरत का जज्बा इंसान को जालिम बना देता है, जबकि मोहब्बत इंसान को फरिश्ते से भी बुलंद मुकाम अता करती है। उन्होंने कहा कि करबला में इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कुर्बानी आज भी हर इंसान के लिए नमूना ए अमल है। मोहर्रम का महीना इन्हीं शहीदों की याद है जिसमे लोग इमाम हुसैन व उनके साथियों की कुर्बानी याद करके गिरिया ओ जारी करते हैं, जोहा ख्वानी व सीनाजनी करते हैं। उनकी शान में काला लिबास पहनते हैं। यह सिलसिला दसवीं मोहर्रम तक जारी रहता है। मजलिस में सोज ख्वानी शबीउल हसन, मरसिया ख्वानी मंजर हसन ने की। नोहा ख्वानी कामरान, सलमान, साजिद ने की। मजलिस में सज्जाद हसनैन, मोहम्मद अली जैदी, शफीक अब्बास, इजलाल जैदी, गजंफर अली, मुजाहिद हसन, हसन जाफर, ताहिर हसन आदि मौजूद रहे।