राम, कृष्ण भारतीय संस्कृति का आधार ‘ रामानुजाचार्य ’
बिजनौर ।श्रीकृष्ण सेवा समिति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ महोत्सव के छठे दिन जगतगुरु रामानुजाचार्य ने कहा कि श्रीराम और श्रीकृष्ण भगवान भारतीय संस्कृति के आधार स्तंभ है । अगर उनको निकाल दिया जाए तो भारतीय संस्कृति अपंग है। श्रीराम का जन्म राजा दशरथ के यहां हुआ था । दस इंद्रियों के रथ पर जो शरीर पर शासन करके रहता हे । उसी के यहां राम का अवतार होता है। अयोध्या अर्थात युद्ध रहित, जिसका जीवन द्विवैष रहित है। अवध अर्थात वध रहित है। श्रीराम ने सर्वप्रथम आतंकियों को जन्म देने वाली ताड़का को मारा डाला था। अर्थात जहां आतंक पनप रहा है पहले उसे समाप्त करे तभी आतंकवाद समाप्त होगा। सभी देश इस बात को समझ रहे है। परंतु राम ने पहले की समझ लिया था। श्रीराम जीवन भर सबको जोड़ने का कार्य करते है। उन्होंने घोर विरोधी वशिष्ठ और विश्वामित्र को जोड़ा था। श्रीराम के कारण देश प्रदेश जुड़े तो देश की राजनीति बदल गई। अब तो सभी श्रीराम मंदिर का निर्माण चाहते है। इस समय देश का सूर्योदय है। कार्यक्रम में सैक ड़ों श्रोता मौजूद रहे।