- अब समिति के सदस्यों को कानूनी कार्रवाई की तलवार लटकी
- लावारिस बच्चों को बिना नियम किसी को भी सौंप दिया गया
- नाबालिग लड़कियों को फर्जी मेडिकल पर सौंपने का भी मामला
- जांच समिति को भी नहीं किया गया सहयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। अभी शासन स्तर से केवल बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष समेत चार को हटाया गया है, एक सदस्य बच गया। वहीं, मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 15 शिकायतें की गई थी। जांच कमेटी ने सभी को सही पाया था। यहां तक की एफआईआर दर्ज कराने तक की संस्तुति जांच कमेटी ने की थी। उधर, शासन की कार्रवाई के बाद हटाए गए समिति अध्यक्ष और तीन अन्य सदस्यों पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटकती नजर आ रही है।
बाल कल्याण समिति की शिकायतें पिछले छह माह से हो रही थी। स्थानीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो शिकायतकर्ताओं ने राज्य बाल संरक्षण आयोग और शासन में इसकी शिकायतें कर दी। शासन से जांच जिले में आई तो कमेटी बनकर जांच हुई। कमेटी के सामने 15 बिंदु थे। जांच गहराई से हुई तो जांच में सभी बिंदु सही पाए गए। प्रशासनिक सूत्रों माने तो इन शिकायतों में करीब तीन मामले लावारिस बच्चों से जुड़े थे। इसमें बिना कानूनी कार्रवाई किए उन्हें किसी को सौंप दिया गया। इसके अलावा आरोप यह भी थे कि नाबालिग लड़कियों के मामले में लापरवाही बरती गई। जांच कमेटी ने अपनी जांच में यह भी बताया था कि जांच के दौरान बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष और सदस्यों ने बिल्कुल सहयोग नहीं किया।
जांच समिति ने मानी घोर लापरवाही, एफआईआर की संस्तुति भी की थी
शासन स्तर से जो आदेश बाल कल्याण समिति को लेकर जारी हुआ है, उसमें कहा गया है कि बाल कल्याण समिति द्वारा किशोर-किशोरियों के जीवन व सुरक्षा संबंधी निर्णयों में नियम तोड़े गए। आयु संबंधित शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को ताक पर रखकर बच्चियों के जीवन को अंधकार में धकेलकर लापरवाही बरती गई। इसके अलावा पक्षकारों से दुरभिसंधि कर अनावश्यक लाभ देने के आरोप भी लगे। जांच कमेटी ने बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्यों और मेडिकल जांच करने वाली टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति भी की थी।
सेफ में ताले, गेट पर सीसीटीवी कैमरा, चाबियां कब्जे में ली
नायब तहसीलदार राजकुमार बृहस्पतिवार की सुबह अपनी टीम लेकर बाल कल्याण समिति कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने सभी सेफ के ताले लगवा दिए। कोई सदस्य बृहस्पतिवार को वहां नहीं दिखाई दिया। इसके बाद गेट बंद करा दिया गया। गेट पर सीसीटीवी कैमरा लगवा दिया गया। ताकि कोई भी कार्यालय में घुसकर रिकॉर्ड से छेड़छाड़ न कर पाए। वहीं इसकी चर्चा पूरी दिन होती रही।
शासन स्तर से ही बनेगी नई कमेटी, एक सदस्य बचा
बाल कल्याण समिति में में अध्यक्ष और तीन सदस्यों पर कार्रवाई हो गई। एक सदस्य मोहसिन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसे लेकर भी चर्चाएं रही। वहीं, अब अध्यक्ष व सदस्यों को लेकर शासन स्तर से ही कोई निर्णय लिया जाएगा। अस्थायी समिति वहीं से बनने की बात कही जा रही है।
राज्य बाल संरक्षण आयोग, शासन से जांच के लिए पत्र आया था। उसमें कुछ शिकायती बिंदु थी। एडीएम न्यायिक की अध्यक्षता में एसपी सिटी, डीपीओ की जांच कमेटी बनाई गई। जांच कमेटी ने शिकायतों को परखा और रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई हुई थी। बाल कल्याण समिति कार्यालय सील करा दिया गया है। आगे का निर्णय शासन द्वारा लिया जाएगा। - अंकित कुमार अग्रवाल, डीएम