-राजस्व अभिलेखों में खारिज करने के कर दिए आदेश
- राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले रसूखदार के नाम की गई जमीन
- बंदोबस्त अधिकारी के आदेश पर खड़े हुए सवाल, एसडीएम ने जताई आपत्ति
- मामला उछला तो डीएम ने शुरू करा दी प्रकरण की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना/बिजनौर। झाड़ी जंगल की जमीनों के अभिलेखों में हेराफेरी कर 60 हजार बीघा जमीन घोटाले का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि इसमें एक और अध्याय जुड़ गया है। दरअसल हाल ही में एक आदेश पर करीब 100 बीघा जमीन के राजस्व अभिलेखों में झाड़ी जंगल का नाम खारिज करते हुए राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले खास व्यक्ति को काश्त का जिम्मा सौंप दिया। इस आदेश पर सवाल खड़े करते हुए एसडीएम नगीना से सख्त आपत्ति जता दी है। उधर डीएम ने भी इस प्रकरण की जांच शुरू करा दी है।
एसडीएम नगीना शैलेंद्र कुमार सिंह ने वन बंदोबस्त अधिकारी बिजनौर को पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया कि मौजा कादरगंज परगना बढ़ापुर के गाटा संख्या 8/1 रकबा 8.182 हेक्टेयर श्रेणी जंगल झाड़ी दर्ज अभिलेख है। एसडीएम नगीना के 28 जुलाई 2008 के आदेश के तहत जंगल झाड़ी के रूप में दर्ज किया गया है। प्रावधानों के अनुसार उप जिलाधिकारी नगीना के आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं की गई। इस प्रकार वह अंतिम आदेश रहा।
पत्र में साफ कहा गया कि इसके विरुद्ध आपको वाद उपरोक्त की सुनवाई का कोई अधिकार प्राप्त नहीं था। वहीं इस जमीन पर राजीव सिंह पुत्र राजा चंद्रभान सिंह का भी कभी कोई कब्जा नहीं रहा और रानी विशाल मंजरी देवी का कभी कोई कब्जा नहीं रहा। अंतिम पारित आदेश वर्तमान तक जारी एवं प्रभावी है। उससे पूर्व के आदेश व आख्या का वर्णन आपके आदेश 7 दिसंबर 2022 में किया गया। उनका कोई अस्तित्व वर्तमान में नहीं रहा है और उनको आधार बनाकर आपने यह आदेश पारित किया है। जबकि 28 जुलाई 2008 का अंतिम आदेश को निरस्त करने अथवा संशोधित करने का अधिकार आपके न्यायालय को प्राप्त नहीं है।
पत्र में कहा गया कि वर्तमान में इस नगीना तहसील क्षेत्र में शासकीय भूमि के दुरुपयोग के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय / उच्च न्यायालयों में प्रकरण चल रहे हैं तथा इनकी जांच राज्य स्तरीय जांच समिति भी कर रही है। ऐसी स्थिति में आपके न्यायालय द्वारा पारित आदेश स्थिर रहना उचित नहीं है। बता दें कि न्यायालय वन बंदोबस्त अधिकारी ने अपने आदेश में खसरा नंबर 8/1 रकबा 8.182 हेक्टेयर को जंगल झाड़ी से निरस्त कर काश्तकार राजीव सिंह पुत्र कुंवर चंद्रभान सिंह निवासी काशीपुर हाउस नैनीताल के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है।
उधर वन बंदोबस्त अधिकारी से जब इस मामले में पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। कहा कि बाद में इस मामले में बात की जाएगी।
पहले भी किया जा चुका है जमीन का घोटाला
नगीना तहसील के 17 गांव में फैली झाड़ी जंगल, नदियों और रास्तों की जमीन के राजस्व अभिलेखों में कूटरचित एंट्री करते हुए कुंवर चंद्रभान सिंह को काश्त का अधिकार दे दिया गया था। बाद में ये जमीनें दूसरे लोगों के नाम दर्ज होती चली गई। तेलीपाड़ा से लेकर दूसरे गांव की करीब 60 हजार बीघा जमीन के मामले में राज्य स्तर पर गठित कमेटी ने जांच की थी। जिसके बाद कुछ गांव की जमीनों में लोगों के नाम खारिज कर झाड़ी जंगल के नाम दर्ज करने के आदेश कुछ महीना पहले ही हुए थे।
जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी: डीएम
यह मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जा रही है। जांच कराकर इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। यह भी जांच कराई जा रही है कि किपिरिस्थितियों में ऐसा किया गया। - उमेश मिश्रा, जिलाधिकारी बिजनौर।