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हर दिन जो करे रोशन, शमां वो जलाना है....

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ज्ञानपुर। जन-जन में समाया जो अंधेरा मिटाना है, हर दिन जो करे रोशन, शमा वो जलाना है... गीतकार कन्हैया लाल निशांत ने जब यह गीत सुनाया पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मौका था हिंदी साहित्य परिषद की ओर से वरिष्ठ साहित्यकार विंध्यवासिनी त्रिपाठी की स्मृति में आयोजित काव्य गोष्ठी का।
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पुरानी बाजार ज्ञानपुर स्थित स्व. त्रिपाठी के आवास पर काव्य गोष्ठी का शुभारंभ पंडित दीनानाथ पाठक ने किया। इसके बाद गीतकार सुरेश पाण्डेय मंजुल ने नए दौर का नया गीत है, वहीं विरोधी वही नीति है...सुनाकर वर्तमान सामाजिक व राजनीतिक स्थिति बताई। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त कवि डॉ. राजकुमार पाठक ने भारतीय घर परिवार क्यों बिखर रहे... कविता सुनाई। संचालन करते हुए विनीत श्रीवास्तव ने जिंदगी कुछ भी नहीं वक्त का खिलौना है... सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पंडित पारसनाथ मिश्र ने अमृत की आस में यहां हर कोई बैठा है, पीकर जमाने का जहर जिये तो जिंदगी... सुनाया। इस पर लोगों ने तालियां बजाई। कवि कर्मराज किसलय, राजन त्रिपाठी, सौरभ त्रिपाठी, राज किशोर, अंशू ने भी अपनी काव्य रचनाएं सुनाईं। अध्यक्षता डॉ. विद्याशंकर त्रिपाठी ने की।
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