चौरी। गर्भवती महिलाओं और नवजातों को लगाए जाने वाले टीके को बिना स्वास्थ्यकर्मियों के निगरानी के ही टीकाकरण केन्द्रों तक पहुंचाया जा रहा है। एक तरफ वैक्सीन को ऑटो से ढोया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ ऑटो चालक बिना किसी स्वास्थ्यकर्मी के मौजूदगी में ही उसे किसी दुकान पर उतार कर चला जाता है। वैक्सीन जैसी संवेदनशील चीज को बिना स्वास्थ्यकर्मी के निगरानी के केन्द्रों तक पहुंचाना, एक बड़ी विभागीय लापरवाही मानी जा रही है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदोही से चौरी क्षेत्र के विभिन्न टीका केंद्र यानी वीएचएनडी सत्र पर गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं को लगाने के लिए वैक्सीन लाया जाता है। भदोही सीएचसी से दो दर्जन से अधिक टीकाकरण केन्द्रों तक वैक्सीन पहुंचाया जाता है। विभाग के अनुसार वैक्सीन को सेंटरों तक पहुंचाने के लिए ऑटो किया गया है। जीर्ण-शीर्ण ऑटो में चालक उसे रस्सी से बांधकर सेंटरों तक ले जाता है। यहां गौर करने वाली बात है कि सेंटरों तक पहुंचाने के दौरान कोई भी स्वास्थ्यकर्मी साथ नहीं रहता। इसके अलावा कई जगहों पर ऑटो चालक बिना किसी आशा की मौजूदगी में ही उसे रखकर चला जाता है। सवाल है कि बिना किसी निगरानी में वैक्सीन इस तरह से सेंटरों पर पहुंचाने कहीं से भी खतरे से खाली नहीं है। चौरी बाज़ार के स्टेशन रोड पर स्थित चकभुईधर गांव, आयुर्वेदिक चिकित्सालय, जमुवा, बरेला, सवरपुर, लठिया, ममहर आदि स्थानों पर सड़क के किनारे ही वैक्सीन उतारे जाते हैं।
वैक्सीन को अलटर वैक्सीन डीलवरी मैन के साथ भेजा जाता है। उसे एक डिब्बे का 90 रुपये भुगतान किया जाता है। चालक का सारा रिकार्ड सीएचसी अधीक्षक के पास होता है। जैसे आधार कार्ड, पासबुक आदि है। यदि बिना किसी स्वास्थ्यकर्मी के अनुपस्थित में चालक सड़क किनारे वैक्सीन का डिब्ब उतार रहा है, तो गलत है। डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही।