गोपीगंज। नगर के बस स्टैंड के समीप स्थित खान कटरे में बिना डॉक्टर के चल रहे अल्ट्रासाउंड सेंटर को बृहस्पतिवार को एसडीएम ज्ञानपुर अरुण कुमार सील कर दिया। प्रशासनिक अफसरों की कार्रवाई से हड़कंप मच गया। बिना उचित दस्तावेजों के चल रहे अन्य सेंटर के संचालक भी दुकान में ताला लगाकर गायब हो गए।
जिले में चल रही कई अल्ट्रासाउंड केंद्र और पैथालॉजी सेंटर गैरप्रशिक्षित लोग चला रहे हैं। इससे मरीजों को सही रिपोर्ट नहीं मिलती। इस कारण उन्हें अधिक पैसे खर्च करके भी नुकसान उठाना पड़ता है। संचालक रेडियोलाजिस्ट की डिग्री और फोटो लगाकर रजिस्ट्रेशन तो करा लेते हैं, लेकिन उसके बाद एक्सपर्ट नहीं दिखते। अफसरों से तालमेल बनाए रखने पर सबकुछ ओके रहता है, लेकिन ऐसा न होने पर कार्रवाई की जाती है। पिछले दिनों जिलाधिकारी विशाल सिंह से इसकी शिकायत की गई थी। जिस पर बृहस्पतिवार को एसडीएम ज्ञानपुर अरुण गिरी, सीएचसी अधीक्षक डॉ. आशुतोष पांडेय, डॉ. स्वप्निल सिंह, डॉ. विमल कुमार और चौकी प्रभारी संतोष सिंह अल्ट्रासाउंड सेंटर पर पहुंचे। जांच में पता चला कि जीएन डायग्नोस्टिक सेंटर बिना डॉक्टर के चल रहा है। अल्ट्रासाउंड सेंटर पर सहमति फॉर्म, रेफरल पर्चीयां, फॉर्मो सोनोग्राफीक प्लेटो और स्लाइडों के व्यवस्थित न होने और डॉक्टर के न होने के बाद भी मरीज सहित अल्ट्रासाउंड कमरे के खुले होने पर एसडीएम ज्ञानपुर ने सील कर दिया। बताते चलें कि अल्ट्रासाउंड के प्रोपराइटर नौशाद जहां के परिजनों द्वारा उसी के बगल दूसरे कमरे में जीवन रक्षा डायग्नोस्टिक अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाया जा रहा है। दो साल पूर्व उसे सील कर दिया गया। लिंग परीक्षण मामले में दोषी होने पर कोर्ट ने अभी दो महीने पहले संचालन कर्ता शोएब खान (नौशाद जहां के जेठ) और विमल सिंह को पांच-पांच वर्ष की सजा और 10 हजार अर्थदंड की सजा सुना चुकी है। बृहस्पतिवार को जब टीम जांच के लिए पहुंची तो कोर्ट से सजा पाए लोग भी वहां मौजूद रहे।
कोट
अवैध एवं नियम विरूद्ध अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की जाएगी। बिना तहकीकात के ही लाइसेंस दे दिया जाता है। जहां भी कमी मिलेगी उसे सील किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के संलिप्त लोगों पर भी सख्ती की जाएगी।
- विशाल सिंह, डीएम भदोही