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खिलौनों और खेलों से होगा बच्चों का बौद्धिक विकास

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ज्ञानपुर। बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए उन्हें खिलौनों और खेलों से जोड़ा जाएगा। खासकर पारंपरिक खेल जैसे गिल्ली-डंडा, कंचा और गुड्डे-गुड़ियों संग अन्य खेलों से बच्चों के बौद्धिक विकास को बढ़ाने का कार्य किया जाएगा। नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों में भाषा और गणित की समझ विकसित करने के लिए इस तरह के खेलों की मैपिंग कराई जाएगी।
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जिले में 892 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय संचालित है। जिसमें एक लाख 95 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। बच्चों को बेहतर शिक्षा और उनके बौद्धिक विकास के लिए शासन स्तर से नए-नए प्रयोग हो रहे हैं। नई शिक्षा नीति के तहत गणित और भाषा में बच्चों को खेल-खेल के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। इसके लिए पूर्व में 12 सप्ताह तक चले चहक प्रशिक्षण से शिक्षकों को जोड़ा गया।
एसआरजी विनय कुमार पांडेय ने बताया कि नवप्रवेशी बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर खेल-खेल के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। पहली से पांचवीं तक के बच्चों को इससे जोड़ा जा रहा है। जिससे पठन-पाठन में उनकी रूचि बढ़े। उन्होंने बताया कि 529 प्राथमिक और 217 कंपोजिट से जुड़े प्राथमिक विद्यालय में यह व्यवस्था शुरू की गई है। इसका असर भी स्कूलों में देखने को मिल रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि खेल और खिलौनों के माध्यम से बच्चों को जोड़कर पढ़ाया जा रहा है। इससे बच्चों में पढ़ने की अभिरुचि बढ़ रही है।
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