मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. निधि यादव ने धोखाधड़ी के दोषी को तीन साल सश्रम कारावास एवं 50 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। एक ही जमीन को कई व्यक्तियों को बेचकर धोखाधड़ी करने में दोषी पाने पर सजा सुनाई गई। करीब 18 साल पुराने मुकदमें में कोर्ट ने निर्णय सुनाया। 27 अक्तूबर 2008 को वादी केशवपुर ने तहरीर में बताया कि छोटेलाल निवासी चकिया ने भूमि संख्या 132 पांच बिस्वा 15 धूर, भूमि संख्या 165 10 धुर को एक लाख 30 हजार में सट्टा किया। एक लाख देने के बावजूद अभियुक्त ने बैनामा करने से टालमटोल किया। जांच में पता चला कि अभियुक्त ने जानबूझकर पहले ही भूमि संख्या-132 को कमलेश चंद उपाध्याय के पक्ष में सट्टा कर दिया था। बाद में उसी जमीन को पचुका देवी के पक्ष में बैनामा कर दिया। इसी प्रकार भूमि संख्या-165 को अपनी पत्नी के पक्ष में पहले ही बैनामा कर चुका था, फिर वादी के साथ इकरारनामा किया। इस प्रकार अभियुक्त ने एक ही संपत्ति को बार-बार बेचकर वादी को धोखा दिया और एक लाख रुपये हड़प लिए। पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी समेत कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज किया। विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में भेजा। शुक्रवार को न्यायाधीश ने छोटेलाल को दोषी मानते हुए जालसाजी में तीन साल का सश्रम कारावास और 50 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की आधी धनराशि 25 हजार केशव पुरी को दी जाएगी।