वहिदानगर। ग्राम पंचायत की लापरवाही कहें या अफसरों की उदासीनता। डीघ ब्लॉक के खेदौपुर गांव में करीब आठ साल पूर्व बना 12 लाख का बरात घर बेकार साबित हो रहा है। यहां पर भूसा रखा है। इससे गांव के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-विवाह के लिए लोगों को टेंट करना पड़ता है। इसमें लोगों को अधिक धन खर्च करना पड़ता है। करीब आठ साल पूर्व ग्रामीणों की मांग पर पूर्व विधायक विजय मिश्र ने विधायक निधि से बारात घर बनाने की सहमति दी। करीब 12 लाख जारी किया गया। पहले तो काम कराने वाले ठेकेदार ने 12 लाख की परियोजना का बंटाधार किया। भवन निर्माण कराया गया, लेकिन पंखा, बिजली कनेक्शन समेत अन्य जरूरी काम नहीं कराए। इससे भवन बनने के बाद आठ साल से वहां न तो बिजली की व्यवस्था की गई और न ही अन्य जरूरी उपकरण जुटा गए। ब्लॉक और ग्राम पंचायत की तरफ से ध्यान नहीं दिया गया। इससे वह बारातघर शोपीस बनकर रह गया। अब हालत यह है कि उक्त बरात घर में अब भूसा और उपलियां रखी जा रही हैं। ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह बरात घर अब जानवरों का चारा रखने और उपले सुखाने की जगह बनकर रह गया है। किसी ने इसमें भूसा रखा है तो किसी ने उपला रखकर इसे निजी भंडारण स्थल बना लिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग किया कि जरूरी कार्य पूर्ण कराकर इसकी शुरूआत कराई जाए। जिससे सरकारी धन की बर्बादी न होने पाए। ग्राम प्रधान बिंदू देवी ने बताया कि बरात घर अभी हैंडओवर नहीं हुआ है। उसमें जल निगम का सामान रखा गया है। बीडीओ डीघ बृजेश नारायण त्रिपाठी ने कहा कि किन कारणों से बारात घर संचालित नहीं हो सका पता लगवाएंगे।