ज्ञानपुर। सबके पास पक्का घर हो, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। बताया जाता है कि इसके तहत हर साल लक्ष्य आवंटित होता है और उसी के अनुसार चयनित ग्रामीणों को आवास मिलता है। जिले के सभी छह ब्लाकों में 750 ऐसे आवास हैं, जो लापरवाही की भेंट चढ़ गए। सरकार के खजाने से धनराशि भी जारी हो गई और आवास भी पूरे नहीं बने। इसमें कहीं अधिकारियों के निगरानी में सुस्ती तो कहीं लाभार्थियों की कमी बताई जा रही है। संबंधित विभाग द्वारा इसे लेकर बार-बार नोटिस भी जारी हो चुकी है, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं आया।
छप्पर और कच्चे घरों में रहने वाले गरीबों के लिए साल 2015-16 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरूआत की। अब तक करीब 20 हजार लाभार्थियों को आवास आवंटित किया गया, लेकिन लापरवाही के चलते सैकड़ों लाभार्थी छप्पर के नीचे सोने को विवश हैं। छतविहीन मकान में बारिश का पानी पहुंच जाता है। कुछ आवास बन चुके हैं, लेकिन उनका छत नहीं पड़ा तो कुछ का प्लास्टर नहीं हुआ है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 750 से अधिक आवास अब भी पूर्ण नहीं हैं। ज्ञानपुर के सरपतहां, चौरी के चकभुईधर, डीघ ब्लॉक के डीघ, सुरियावां के जमुनीपुर अठगवां समेत दर्जन भर से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां दो से तीन आवास अधूरे रह गए हैं। परियोजना निदेशक मनोज कुमार राय ने कहा कि आवास पूर्ण कराने के लिए सचिव और प्रधान को निर्देश दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में स्वीकृत पीएम आवास 6386 के सापेक्ष 6176 ही पूर्ण हो सके हैं। जबकि 210 आवास अपूर्ण हैं। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2021-22 में 7169 के सापेक्ष 6607 आवास पूर्ण हो गए हैं। इस वित्तीय वर्ष में 540 आवास अपूर्ण हैं।
दो साल से आवास बनने का इंतजार
चौरी। भदोही ब्लॉक के चकभूईधर गांव में प्रधानमंत्री आवास की हालत दयनीय है। यहां की लाभार्थी शारदा देवी, रवि, राजेंद्र और शिव कुमार को दो साल पूर्व आवास की रकम आवंटित हुई। लाभार्थियों ने आरोप लगाया कि सुविधा शुल्क लेने के बाद भी उनके आवास नहीं बन सके। जिसके कारण प्लास्टिक आदि लगाकर किसी तरज गुजर-बसर कर रहे हैं। ग्राम प्रधान मंजू जायसवाल ने कहा कि सभी आवास पूर्व के वर्ष के हैं। इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई है।
अमीर गटक गए गरीबों का हक
जिले में सैकड़ों मामले ऐसे हैं जहां गरीबों के नाम पर आने वाला आवास अमीरों ने मार लिया। जब अधिकारियों को इसके बारे में पता चला तो वह जांच किए और कार्रवाई तक बात पहुंच गई। डीघ ब्लाक क्षेत्र में तीन ऐसे मामले आ चुके हैं। तीनों को दो नोटिस भेजी जा चुकी है। बीडीओ बताते हैं कि अब आरसी भेजी जाएगी। यहीं स्थिति अन्य ब्लाकों की भी है। वर्ष 2018 में हुई जांच के आधार पर पता चला था कि साढ़े चार सौ से अधिक लोगों ने तत्थ्य छिपाकर आवास ले लिया था। पहली किस्त के रूप में 40-40 हजार रुपये भी जारी हो गए थे। इसमें से करीब सवा तीन सौ अपात्रों से रिकवरी भी हो गई, बाकी को नोटिस जारी की गई है। गंगारामपुर, बहुता, चकडाही, गड़ौरा, डगहर, नीबी, दशवतपुर आदि गांवों में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।
सभी बीडीओ और एडीओ पंचायत को हिदायत दी गई है कि वह नए प्रधान और सचिव से बात कर अधूरे आवासों को पूरा कराएं। सरकारी पैसा खाने वाले लाभार्थियों पर सख्त कार्रवाई करें।- मनोज कुमार, परियोजना निदेश- डीआरडीए