केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार स्मारिका का विमोचन करते हुए
केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि भारतीय कालीन उद्यमियों और बुनकरों की कला का पूरा विश्व कायल है। यही कारण है कि भारतीय कालीन उद्योग 17 प्रतिशत वार्षिक की रफ्तार से विकास कर रहा है।भारत सरकार इस कला को बचाए रखने को संकल्पित है और इस क्षेत्र के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे कार्य जारी रहेंगे। वे शुक्रवार को दोपहर नई दिल्ली के ओखला के राष्ट्रीय लघु उद्योग कांप्लेक्स में 31वें इंडिया कारपेट एक्सपो का शुभारंभ करने के बाद बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच भारतीय कालीन निर्यात यदि 17 प्रतिशत वार्षिक के हिसाब से प्रगति कर रहा है तो यह अच्छा है। कहा कि इसमें आप लोगों को निरंतरता बनाए रखनी होगी। देश भर से आए सभी कालीन प्रदर्शकों को यकीन दिलाया कि प्रधानमंत्री का मेक इन इंडिया का नारा सार्थक सिद्ध हो रहा है और इससे कालीन सेक्टर को लाभ होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब हमारे कालीन निर्यातक विकास करेंगे तो उसका लाभ बुनकरों को भी होगा। इस मौके पर उनके साथ वस्त्र सचिव, रश्मि वर्मा और विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के. गोपाल भी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस अवसर पर कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) द्वारा प्रकाशित स्मारिका का भी विमोचन किया।
उद्घाटन के बाद परिषद के चेयरमैन, कुलदीप राज वाटल और अधिशासी निदेशक, शिवकुमार गुप्ता ने राज्यमंत्री और वस्त्र सचिव को मेला क्षेत्र का अवलोकन कराया, जहां काफी देर तक मेला क्षेत्र में ठहर कर वे खुद कालीन निर्यातकों से रूबरू हुए और आवश्यक जानकारी ली। चेयरमैन ने उन्हें बताया कि देश भर के कुल 270 कालीन निर्माता और निर्यातक यहां अपने कालीनों का प्रदर्शन करने के लिए जुटे हैं, जबकि पहले दिन लगभग 250 की संख्या में मझोले और बड़े कालीन आयातकों ने मेला क्षेत्र में कदम रखा। जबकि 150 की संख्या में विदेशी आयातकों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
उद्घाटन के मौके पर भारतीय कालीन उद्यमियों का उत्साहवर्धन करने के लिए भदोही के सांसद विरेंद्र सिंह मस्त खुद भी मौजूद रहे। उन्होंने कालीन उद्योग की बेहतरी के लिए और उपाय किए जाने की राज्यमंत्री से वकालत की। इस अवसर पर प्रथम उपाध्य हाजी अब्दुल रब अंसारी, ओएन मिश्र बच्चा, उमेश कुमार गुप्ता, घनश्याम शुक्ला, भरतलाल मौर्य, इस्तीयाक खां आदि मौजूद रहे।