मुख्य विकास अधिकारी यशवंत कुमार सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आईसीडीएस विभाग की समीक्षा की गई। इसमें गोद लिए गांव में अतिकुपोषित, कुपोषित बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं, निगरानी, अनुश्रवण पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर महीने गांव में जाकर प्रगति देखें। जिला कार्यक्रम अधिकारी मंजू वर्मा ने बताया कि राज्य पोषण मिशन के तहत जिले के नोडल अधिकारी आंगनवाड़ी केंद्रों को गोद लिए हैं। सही पोषण-देश रोशन भाव तहत बच्चों के पोषण की स्थिति कुपोषित/अतिकुपोषित बच्चों, एनआरसी, पोषण ट्रैकर, होम विजिट आदि की समीक्षा की जाती है। 11 से 14 वर्ष की स्कूल न जाने वाली किशोरी बालिकाओं एवं एनीमिक किशोरियों को आयरन गोली दी जाती है। सीडीओ ने जच्चा-बच्चा के पोषण संबंधी कार्यो में लापरवाही बरतने वाले सुपरवारईजर और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को चेतावनी दिया। कहा कि अप्रैल में अपेक्षित प्रगति न होने पर वेतन रोकने की कार्रवाई होगी। ई-कवच में शिथिलता और लापरवाही बरतने पर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी को नोटिस जारी किया। उन्होंने सैम-मैम बच्चों के चिह्नांकन के लिए नए तरीकों के अपनाने पर जोर दिया। कहा कि जब जच्चे-बच्चें को सही पोषण मिलेगा, तभी देश रोशन होगा। सीडीओ ने आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेने वाले अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह भी समय-समय पर केंद्रों का निरीक्षण करते हुए बीडीओ, सुपरवाईजर, आंगनवाड़ी, चिकित्सक से समन्वय स्थपित करें। इस मौके पर डीएफओ नीरज वर्मा, डॉ. ओपी शुक्ला, डॉ. राजेंद्र कुमार, बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह आदि रहे।