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गर्मी:इमरजेंसी रोस्टिंग से जनजीवन अस्त-व्यस्त

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ज्ञानपुर। मई-जून की गर्मी अप्रैल के दूसरे सप्ताह में ही पड़ जाने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। प्रतिदिन इमरजेंसी रोस्टिंग जारी रहने के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त होने लगा है। दिन में बिजली कब आएगी और रात में कब चली जाएगी न उपभोक्ता समझ पा रहे हैं उपकेंद्रों पर तैनात अधिकारी। नगरीय क्षेत्र में निर्धारित रोस्टर 20 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे के बजाय इसकी 50 फीसदी ही बिजली मिल रही है। उपभोक्ताओं ने कहा कि एक दशक पूर्व से लगे उपकरणों पर सौभाग्य योजना, हाईवे, रेलवे स्टेशन, हाल्ट, कल-कारखाना, सरकारी, निजी प्रतिष्ठानों का भार है लेकिन उपकरण नहीं बदले जा रहे हैं। आपूर्ति समय से शुरू होती है लेकिन बीच में इमरेंजसी रोस्टिंग होते रहने से घरों में लगे वैकल्पिक संसाधन डिस्चार्ज हो जा रहे हैं। गर्मी की हालत यह है कि पंखे न चलने से व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बैठना मुश्किल है। यही स्थिति रात के समय सामने आने पर नींद हराम होती है। सुविधा संपन्न उपभोक्ता जनरेटर का सहारा लेते हैं वह भी कुछ समय के लिए। जनरेटर की सुविधा ग्रामीण क्षेत्र में न होने से महिलाओं से लेकर बच्चे तक बिजली का इंतजार करते हैं। अधिशासी अभियंता सदर अमर सिंह ने बताया कि उपकरणों को बचाने के लिए इमरजेंसी रोस्टिंग ऊपर हो रही है। प्रतिदिन 01 एमयू की खपत बढ़ जाने से व्यवस्था को सुचारु रख पाना मुश्किल हो रहा है।
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