ज्ञानपुर। गांव की गलियों को दूधिया रोशनी से रोशन करने की मुहिम कालीन नगरी में धड़ाम हो गई है। करीब 16 से 17 करोड़ रुपये खर्च कर जिले की 546 ग्राम पंचायतों में लगी स्ट्रीट और सोलर लाइटें चंद महीने में ही बुझ गईं। मानक को दरकिनार कर की गई खरीद का खामियाजा अब ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा है। बेकार हो चुकी लाइटों की न तो मरम्मत हो सकी, न ही अफसरों की तरफ से कोई कार्रवाई की गई। इसे लेकर तमाम सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
केंद्र और प्रदेश सरकार गांव के विकास को लेकर विभिन्न मदों में हर साल लाखों रुपये आवंटित करती हैं। केंद्रीय वित्त, राज्य वित्त, अनटाइड फंड, स्वच्छता मिशन के मद में मिलने वाली रकम से ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए जाते हैं। छह से सात साल पूर्व से गांव के खंभों एवं सार्वजनिक स्थलों पर स्ट्रीट और सोलर लाइटें लगाकर रोशनी फैलाने की शुरुआत की गई। मकसद रहा कि शहरों की तर्ज पर गांव-गिरांव की सड़कों पर ये लाइटें उजाला बिखेरेंगी तो चोर-उचक्कों पर अंकुश लगेगा। लोगों को लाइट की व्यवस्था नहीं करनी होगी। योजना के तहत गांव-गांव स्ट्रीट लाइट, सोलर पैनल लगाने में लाखों रुपये खर्च कर दिए गए। लेकिन, चंद महीने बाद ही गांव की गलियों के विद्युत पोल पर लगीं स्ट्रीट लाइटें व तिराहे, चौराहों से सोलर लाइटें गायब हो गईं। भ्रष्टाचार के चलते योजना फलीभूत नहीं हो सकी। इससे गांव की गलियों में रात में अंधेरा कायम रहता है। रविवार को अमर उजाला की टीम ने भदोही ब्लाॅक के बरवा गांव में पड़ताल की तो यहां लगाई गईं करीब 100 स्ट्रीट लाइटों में से 65 खराब हो चुकी हैं। इसी तरह बहुतरा में 50 लाइटों में 35 तकनीकी खराबी से बंद हो चुकी हैं। अभोली के नीबी में 65 में 15, मसुधी में 70 में 25 खराब हो चुकी हैं। यह तो बानगी है, जिले की 546 ग्राम पंचायतों में कमोबेश यही हालत है।
ज्ञानपुर। ग्राम पंचायतों में स्ट्रीट लाइटें लगाने में भी जमकर गड़बड़ी की गई है। बाजार में उसकी कीमत दो हजार से ढाई हजार है, जबकि फर्मों को 4500 से लेकर 5000 तक का चेक काटा गया। मानक सही न होने पर कम समय में ज्यादातर गांवों में स्ट्रीट लाइटें खराब हो गईं। इसी तरह सोलर लाइटों पर 12 से 13 हजार के बजाय 20 से 21 हजार का चेक काटा गया। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो दोनों पर ग्राम पंचायतों ने करीब 16 से 17 करोड़ रुपये खर्च किए।
ज्ञानपुर। सुरियावां ब्लॉक के महजूदा गांव के ग्राम प्रधान राजमणि पांडेय ने बताया कि फर्म से 50 स्ट्रीट लाइटें मंगाई गईं। तकनीकी खराबी के कारण एक दिन भी लाइट नहीं जली। इसे वापस भेजकर दूसरी मंगाई गई है। अभी तक पैसे का भुगतान नहीं किया गया है। छह महीने सही जलने पर ही फर्म को पैसा दिया जाएगा।
गांव की गलियों में प्रकाश की व्यवस्था के लिए स्ट्रीट लाइट और सोलर पैनल सेट लगाए गए हैं। इनकी देखभाल व मरम्मत की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। हालांकि इसके लिए शासन से धन निर्गत नहीं होता है। खराब लाइटों की मरम्मत का प्रयास किया जाएगा। - राकेश कुमार यादव, डीपीआरओ