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सोलर वाटर पंप लगे नहीं, हो गया भुगतान

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ग्रामीण अंचलों में स्वच्छ पानी मुहैया कराने की मुहिम का प्रधानों और सचिवों ने सरकारी धन का बंदरबांट किया है। कई गांवों में बिना सोलर वाटर पंप लगे भुगतान कर दिया गया। पूर्व प्रधान और सचिवों के तालमेल से खेल हो गया। अब नई ग्राम पंचायत का गठन होने के बाद की गई गड़बड़ी की पोल खुलने लगी है। केंद्र और प्रदेश सरकार गांवों के बेहतर विकास पर जोर देती हैं। राज्य और केंद्रीय वित्त के मद से अलग-अलग विकास कार्य होते हैं। जिसमें नाली, खड़ंजा, इंटरलाकिंग, शौचालय, मिशन कायाकल्प में स्कूलों के सुंदरीकरण और सोलर वाटर पंप की स्थापना जैसे काम शामिल हैं। अधिकतर ग्राम पंचायतों में बेहतर कार्य हुए, हालांकि कुछ गांवों में सचिव और प्रधानों ने तालमेल बनाकर बिना काम कराए ही भुगतान करा लिया। ताजा मामला सुरियावां ब्लॉक के महजूदा गांव का सामने आया है। यहां के ग्राम प्रधान राजमणि पांडेय ने डीडीओ को शिकायत कर जांच की मांग की। पत्र में कहा कि बिना सोलर वाटर पंप लगे ही करीब दो लाख आहरित हो गया है। एक पंप की कीमत दो से ढाई लाख रुपये तक है। प्रकरण की जांच कराकर सचिव और प्रधान से रिकवरी कराई जाए। यह तो एक बानगी है। डीघ के 11 ग्राम पंचायतों में इसी तरह 45 लाख के घपले में एडीओ पंचायत अजय पांडेय फंस गए हैं। निलंबित सचिव नितेश वर्मा के फंड ट्रांसफर आर्डर से 45.33 लाख रुपये का भुगतान कर लिया गया। मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी करने वालों से रिकवरी होगी।
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