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आत्महत्या के लिए उकसाने में छह को कारावास

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ज्ञानपुर। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक द्वितीय की अदालत ने विवाहिता के आत्महत्या के मामले में पति को पांच वर्ष, ससुर, जेठ और जेठानी को तीन-तीन वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। एक दशक पूर्व विवाहिता की मौत के मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया। जिससे पीड़ित को न्याय मिला। घटना के मुताबिक सूर्यमणि तिवारी ने आरोप लगाया था कि उसने अपनी लड़की मीना की शादी वर्ष 2006 में अनुराग शुक्ला निवासी कांतिरामपुर थाना सुरियावां से किया था। जिसका गौना 2008 में किया। उसने अपनी लड़की को बाइक, एक लाख नकद दिया था। ससुराल जाने पर उसके ससुर जटाशंकर, पति अनुराग, जेठ संतोष कुमार, आशुतोष, जेठानी सीमा, कन्या दहेज में कार की मांग करने लगी। उसकी बेटी को ठीक से भोजन और कपड़ा भी नहीं दिया जाता था। 15 मार्च 2011 को जब वह अपनी लड़की मीना से मिलने ससुराल गया तो उसने सारी बात बताई। 19 अप्रैल 2011 को फोन पर उत्पीड़न की बात कही। 20 अप्रैल को उसकी बेटी के मौत की सूचना दी गई। वादी ने आरोप लगाया था कि उसकी लड़की को दहेज के लिए जहर देकर मार दिया गया। पुलिस ने मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर आरोपपत्र कोर्ट में भेजा। जहां गवाहों के बयान- तर्क सुनने के बाद न्यायाधीश आलोक कुमार यादव की अदालत पति अनुराग शुक्ला को पांच वर्ष, ससुर जटाशंकर, जेठ आशुतोष, संतोष, जेठानी सीमा और कन्या देवी को तीन-तीन साल कारावास की सजा सुनाई। वादी की ओर से पैरवी शासकीय अधिवक्ता पंकज तिवारी ने किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के मिशन शक्ति योजना के तहत महिलाओं के प्रति गंभीर मुकदमों की सूची में यह सूचीबद्ध था। जिलाधिकारी की ओर से समय-समय पर निगरानी की जाती है। सरकार की पहल महिलाओं को न्याय दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।
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