जनपद के प्रमुख धार्मिक पौराणिक पर्यटन स्थलों में शुमार सीतामढ़ी मौजूदा समय में सरकारी तंत्र की उपेक्षा का शिकार है। उपेक्षा के चलते पर्यटन स्थल का विकास अधर में लटका है। कोरोना काल के बाद यहां पर्यटन आश्रित व्यवसाय को नुकसान हुआ है। गौरतलब है कि कोरोना काल से पूर्व सीतामढ़ी में औसतन 15 से 20 हजार श्रद्धालुओं और सैलानियों का आगमन यहां होता था। लेकिन अब यह संख्या महज हजार दो हजार तक सिमट गई है। शैलानियों के आकर्षण के प्रमुख केंद्र सीता मंदिर, मां गंगा का पावन तट, 108 फिट ऊंचे श्री हनुमान जी की मूर्ति, महर्षि वाल्मीकि आश्रम, बाबा धवासानाथ आश्रम, उड़िया बाबा आश्रम स्थलों पर शाम ढलते ही अंधेरा पसर जाता है। बुनियादी सुविधाएं मसलन बिजली, स्वच्छ पेयजल, सुलभ शौचालय, रैन बसेरा, पार्किंग की अव्यवस्था परेशानी के सबब हैं।