एनसीटीई और केंद्र सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए सांसद के घेराव की बात कही गई।
शिक्षामित्रों ने हाईकोर्ट के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि एनसीटीई और भारत सरकार के ढुलमुल रवैये से प्रदेश के शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द हुआ। उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाया गया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट के डबल बेंच में एनसीटीई ने शिक्षामित्रों को टीईटी की छूट स्वीकार किया और इलाहाबाद हाईकोर्ट में दिए शपथ पत्र में शिक्षामित्रों को शिक्षक बनने का पात्र नहीं बताया गया। संगठन के क्रांतिमान शुक्ला ने कहा कि समायोजन रद्द होने के बाद शिक्षामित्र अब शांत नहीं बैठेंगे। वह अपना हक पाने के लिए आरपार की लड़ाई लड़ेंगे। एनसीटीई, भारत सरकार, राष्ट्रपति से लेकर सुप्रीमकोर्ट तक अपनी आवाज बुलंद करेंगे। शिक्षामित्रों ने सर्व सम्मति से 14 सितंबर को स्कूलों में शैक्षणिक कार्य का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। बैठक में रश्मिकांत द्विवेदी, श्यामजी दूबे, प्रदीप, प्रमोद पाठक, राम सागर शुक्ला, अखलाख अहमद, राजेश मौर्य, रजनीश पाठक, सूर्यमणि, रामचंद्र, सुभाष तिवारी, महेंद्र यादव, विनोद यादव सहित कई शिक्षामित्र मौजूद रहे।