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Bhadohi News: शरद पूर्णिमा आज, मां लक्ष्मी और चंद्रदेव का होगा पूजन

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गोपीगंज। शरद पूर्णिमा का पर्व इस बार छह अक्तूबर यानी सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा होती है। आचार्यों के अनुसार शरद पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए खास माना जाता है। कहते हैं इस रात मां लक्ष्मी भ्रमण पर निकलती हैं। इस रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होते हैं, इसलिए चांद की रोशनी पृथ्वी को अपने आगोश में ले लेती है। आचार्य शरद पांडेय ने बताया कि वर्ष के 12 महीनों में यह पूर्णिमा ऐसी है, जो तन, मन और धन तीनों के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इस पूर्णिमा को चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है। धन की देवी महालक्ष्मी रात में यह देखने निकलती हैं कि कौन जाग रहा है और वह अपने कर्मनिष्ठ भक्तों को धन-धान्य से भरपूर करती हैं। शरद पूर्णिमा का एक नाम कोजागरी पूर्णिमा भी है, यानी लक्ष्मी जी पूछती हैं कि कौन जाग रहा है? आश्विन महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में होता है इसलिए इस महीने का नाम आश्विन पड़ा है। बताया कि आयुर्वेदाचार्य वर्ष भर इस पूर्णिमा की प्रतीक्षा करते हैं। जीवनदायिनी रोगनाशक जड़ी-बूटियों को वह शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखते हैं। मान्यता है कि पूर्णिमा की पूरी रात खीर को चांदनी में रखने के बाद सुबह खाली पेट खाने से सभी रोग दूर होते हैं। बताया कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देना बेहद शुभ माना जाता है। इसके लिए एक कलश या लोटे में स्वच्छ जल भरें और उसमें थोड़ा कच्चा दूध, चावल, मिश्री, चंदन और सफेद फूल डालें। स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा की ओर मुख करके जल अर्पित करें। धीरे-धीरे धार बनाते हुए चंद्रदेव को अर्घ्य चढ़ाएं। बताया कि रात 11:08 से 11:57 बजे के बीच निशीथ काल पूजन के लिए उपयुक्त है।
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