ज्ञानपुर। सरकारी राशन की कालाबाजारी करने वाले ठेकेदार विनित सिंह और मिल संचालक शिव नारायण पर शिकंजा कसता जा रहा है। मुकदमा दर्ज होने के बाद अब टेंडर निरस्त करने की कवायद शुरू हो गई है। मामला भ्रष्टाचार से जुड़े होने और कमिश्नर और डीएम की नजर में होने से पूर्ति विभाग और विपणन भी खुद को अलग करने में जुट गए हैं। जिले में 700 से अधिक कोटे की दुकानों पर पूर्व में विपणन विभाग के माध्यम से राशन की आपूर्ति की जाती थी, लेकिन मार्च 2022 के बाद यह जिम्मेदारी पूर्ति विभाग को सौंप दी गई। अभी पांच महीने भी नहीं बीते थे कि राशन कालाबाजारी का खेल शुरू हो गया। ठेकेदार और पूर्ति विभाग की मिलीभगत से चल रहा खेल का भंडाफोड़ दो दिन पूर्व हो गया, जब कमिश्नर के निर्देश पर नथईपुर कसिदहां में शिव राइस मिल पर छापा मारा गया। यहां 332 बोरी सरकारी राशन बरामद हुआ था। डीएम के निर्देश पर शुक्रवार को ठेकेदार विनीत सिंह सहित तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। अब उक्त फर्म का टेंडर निरस्त करने और उसे काली सूची में डालने की कवायद शुरू हो गई है। जिला विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि राशन की कालाबाजारी का मामला डीएम के संज्ञान में है। टेंडर निरस्त करने और काली सूची में डालने की कार्रवाई चल रही है। भदोही और औराई तहसील में भी पूर्ति विभाग के तालमेल से खेल चल रहा है। जांच की डर से कोटेदार भले ही नहीं बोलते, लेकिन दबी जुबान से घटतौली की आवाज पहले भी उठा चुके हैं। गोदामों से उठान के समय होने वाली गड़बड़ी को लेकर कोटेदार संगठन कई बार अधिकारियों को पत्र दे चुका है, लेकिन विभाग के डर से मामला ठंडे बस्ते में चला जाता। नथईपुर-कसिदहां में 332 बोरी सरकारी राशन मिलने के बाद औराई और भदोही में आपूर्ति करने वाली फर्मों की जांच करने की आवाज उठने लगी है।