ज्ञानपुर। मिनी सचिवालय और सामुदायिक शौचालय निर्माण में प्रधान और सचिवों ने जमकर धांधली की है। बजट खर्च होने के बाद भी 150 पंचायत भवन और शौचालय पूर्ण न होने पर पूर्व प्रधानों पर पंचायत राज विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। करीब 150 ऐसे पूर्व प्रधानों और सचिवों से खर्च की गई रकम की रिकवरी की जाएगी। विभाग ने इसके लिए 15 दिन का समय दिया है।
गांवों को स्मार्ट बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों का निर्माण कराकर उन्हें पंचायत सचिवालय का रूप दिया है। उद्देश्य यह कि ग्राम पंचायतों में बैठकों का आयोजन, गांव स्तर पर पंचायत सचिव की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इनका निर्माण कराया जाना है। ताकि ग्रामीणों को गांव में ही आय, जाति, निवास जैसे प्रमाण पत्र हासिल हो जाय तो अन्य कार्य के लिए भी तहसील कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े। वित्तीय वर्ष 2020-21 में ही पंचायत भवनों के निर्माण को हरी झंडी देकर जरूरी धनराशि भी उपलब्ध करा दी गई थी। इतना ही नहीं पंचायत सचिवालय में कार्य हो सके सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों की तैनाती भी हो चुकी है। 2022 में सरकार बनने पर 100 दिन की कार्ययोजना में पंचायत भवन और सामुदायिक शौचलय को शामिल किया गया। शासन के निर्देश का असर भी प्रधानों और सचिवों पर नहीं पड़ा। आलम यह है कि 90 पंचायत भवन और 60 से अधिक सामुदायिक शौचालय अब तक पूर्ण नहीं हो सके। वर्तमान प्रधान भी उदासीन बने हुए हैं। स्वीकृत बजट पहले ही खर्च होने के कारण नए प्रधान अलग से बजट ऐसे भवनों पर नहीं खर्च कर रहे हैं। डीपीआरओ कार्यालय की ओर से पिछले दिनों अभोली ब्लॉक के 15 गांव की जांच कराई गई, जिसमें निर्माण में धांधली सामने आई। अब पंचायत राज विभाग बजट खर्च करने के बाद भी निर्माण पूर्ण न कराने वाले 150 पूर्व प्रधानों और सचिवों से रिकवरी की तैयारी में लग गया है। डीपीआरओ राकेश कुमार यादव ने कहा कि 15 दिन का समय पूर्व प्रधानों और सचिवों को दिया गया है। निर्धारित समय में पंचायत भवन और सामुुदायिक शौचालय पूर्ण न होने पर रिकवरी नोटिस जारी की जाएगी।