ज्ञानपुर/ दुर्गागंज। संत रविदास की जयंती शनिवार को जिले में धूमधाम से मनाई गई। उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया। संगठनों की ओर से आयोजित कार्यक्रम में चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया गया। अंत में लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।
अभोली ब्लाॅक के गौरा स्थित तालाब पर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि देवेंद्र पांडेय की अध्यक्षता में जयंती मनाई गई। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी अपना अधिकांश समय भगवान की पूजा में लगाते। धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए एक संत का दर्जा प्राप्त किया। ''मन चंगा तो कठौती में गंगा'' रविदास जी का ये दोहा आज भी प्रसिद्ध है। रविदास जी का कहना था कि शुद्ध मन और निष्ठा के साथ किए काम का हमेशा अच्छा परिणाम मिलता है। मनोज गौतम ने कहा कि रविदास जी ने अपनी आजीविका के लिए पैतृक कार्य को अपनाया, लेकिन इनके मन में भगवान की भक्ति पूर्व जन्म के पुण्य से ऐसी रची बसी थी कि आजीविका को धन कमाने का साधन बनाने की बजाय संत सेवा का माध्यम बना लिया। अंत में भक्तों को प्रसाद वितरण भी कराया गया। इस मौके पर उप निरीक्षक शशिकांत, श्रीनिवास राय, मूलचंद गौतम, दयाराम, गुड्डू, कमलेश, दिनेश गौतम, राम सुचित, कल्लू मिस्त्री, रामचंद्र, राम शिरोमणि, सनी,धीरेंद्र, विकास, बाल गोविंद आदि रहे। प्राथमिक विद्यालय फत्तूपुर में संत रविदास की जयंती शिक्षकों और बच्चों ने धूमधाम से मनाई। प्रधानाध्यापक धीरज सिंह ने बताया कि संत रविदास का जन्म वाराणसी के पास के सरायगोवर्धन गांव में हुआ था। वह बेहद धार्मिक स्वभाव के थे। वे भक्तिकालीन संत और महान समाज सुधारक थे। उन्होंने भगवान की भक्ति में समर्पित होने के साथ-साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन किया। बच्चों ने भी इस महान संत के जीवन से प्रेरणा लेते हुए अपने विचार रखे और ऊंच नीच छुआछूत जैसी बुराइयों से दूर रहने का संकल्प लिया। मोढ़ के चकचंदा गांव में बसपा की ओर से रविदास जयंती मनाई गई। इस मौके पर मंडल जोन इंचार्ज रामलाल पाल, कृष्णकुमार पाल, गुड्डू गौतम, जयनाथ गौतम आदि रहे।