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लापरवाही में 36 प्रधानाचार्यों का रोका वेतन

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ज्ञानपुर। यूपी बोर्ड की कापियों के मूल्यांकन में नामित परीक्षकों को कार्यमुक्त न करने, परीक्षक किन कारणों से नहीं आ रहे हैं उसका जवाब न देने पर 36 प्रधानाचार्यों का डीआईओएस ने वेतन रोक दिया। माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजी रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई। विभागीय कार्रवाई से प्रधानाचार्यों में खलबली मच गई है। जिले में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की कापियों का मूल्यांकन 23 अप्रैल से शुरू है। हाईस्कूल की कापियां नेशनल इंटर कॉलेज भदोही और इंटरमीडिएट की जीआईसी ज्ञानपुर में जांची जा रही हैं। दोनों केंद्रों पर करीब एक लाख 64 हजार कापियों का मूल्यांकन होना है। शुरुआती दिनों में ही बड़ी संख्या में परीक्षक और डीएचई मूल्यांकन केंद्र नहीं पहुंचे। शुरुआत में प्रायोगिक परीक्षा होने का हवाला दिया गया, लेकिन ऑनलाइन सिस्टम में परीक्षक बने शिक्षकों की मनमानी सामने आई। परिषद की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में 100 से अधिक परीक्षकों के मूल्यांकन में शामिल न होने की पुष्टि की गई। जिसको लेकर डीआईओएस ने प्रधानाचार्यों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा, लेकिन 18 वित्तपोषित और 18 राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने सही जवाब नहीं दिया। जिसको संज्ञान में लेते हुए डीआईओएस एनएल गुप्ता ने उनका वेतन रोक दिया। उन्होंने बताया कि कई प्रधानाचार्यों की ओर से परीक्षकों को कार्यमुक्त न करने की बात सामने आई। जिससे वह मूल्यांकन केंद्रों पर कापियां जांचने नहीं पहुंच सके। ज्ञानपुर। मूल्यांकन कार्य में लापरवाही बरतने पर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सख्ती की तो एडेड स्कूल के लिपिक से लेकर शिक्षक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की दौड़ लगाने लगे। विभागीय कर्मचारियों से मिलकर तमाम प्रकार की समस्याओं का हवाला दे रहे हैं, हालांकि मामला परिषद से जुड़ा होने के कारण कर्मचारी भी पल्ला झाड़ दिए।
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