जिले की लगभग छह हजार मीटर क्षतिग्रस्त नालियों का निर्माण अभी तक नहीं हो सका। नलकूप विभाग की ओर से पिछले वित्तीय वर्ष में ही भेजी गई 50 लाख की कार्ययोजना को मंजूरी मिल गई, लेकिन चार माह बीतने के बाद भी बजट का प्रावधान नहीं हो सका है। ऐसे में लगभग 30 नलकूपों से जुड़े 6000 मीटर नालियों की सफाई व मरम्मत का कार्य अधर में है। इससे आगामी मानसून सीजन में किसानों के खेतों तक पानी पहुंचने में मुश्कित होगी। जिले के ढाई लाख लघु व सीमांत किसानों की सिंचाई व्यवस्था चार सौ किमी नहर, राजवाहा, माइनर के साथ ही 518 राजकीय नलकूपों पर निर्भर है। लगभग छह दशक पहले स्थापित सभी नलकूपों की हालत अब जर्जर हो गई है। किसानों की समस्या को ध्यान में रखकर नहर विभाग अब तक दो चरणों में 10 हजार मीटर नालियों की सफाई व मरम्मत का कार्य करा चुका है। पहले चरण में 16 नलकूपों से जुड़े 3200 और दूसरे चरण में 34 नलकूपों से जुड़े 6400 मीटर नालियों की मरम्मत का कार्य हुआ। इसके बाद नलकूप विभाग की ओर से 30 नलकूपों से जुड़ी नालियों की मरम्मत के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर शासन ने 50 लाख रुपये की कार्ययोजना को मंजूरी दी, लेकिन उसके लिए अब तक बजट पास नहीं हो सका है। ऐसे में 30 नलकूपों से जुड़े नालियों की मरम्मत व सफाई की कार्ययोजना अधर में लटकी हुई है। अधिशासी अभियंता नलकूप राजेश भारतीय ने कहा कि बजट का इंतजार किया जा रहा है। बजट आवंटित होते ही नलकूप से जुड़ी नालियों के मरम्मत व सफाई के कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।
नलकूप ठीक, लेकिन नालियों ने बढ़ाई परेशानी
ज्ञानपुर। अभोली ब्लॉक के किसान नवीन सिंह, दिलीप सिंह, सुजौली बिंद, बंशीधर, मुरली, मुन्नीलाल, धर्मराज प्रजापति, बबलू बिंद आदि ने कहा कि गांव में लगा नलकूप ठीकठाक है, लेकिन नालियों की खराबी के कारण खेत तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। लगभग तीन वर्ष से यह समस्या है। किसी तरह किसान नलकूप चलवाकर पानी ले भी जाते हैं, तो पूरा पानी रास्ते में ही बर्बाद हो जाता है और खेत सिंचाई से वंचित रहते हैं। डीघ ब्लॉक के बसहीं निवासी रामलाल, दरवांसी निवासी सुनील सिंह ने कहा कि नलकूप नंबर प्रथम दो गांवों की सीमा पर है। इसका रखरखाव नहीं होता। पश्चिमी छोर की नालियां क्षतिग्रस्त होकर ढह गई हैं तो पूर्वी छोर पर लीकेज के चलते किसान मायूस रहते हैं। संवाद