ज्ञानपुर/औराई। जिले की हर ग्राम पंचायत में ज्ञानालय के माध्यम से छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास हो रहा है, लेकिन औराई में 20 लाख की लागत से बने राजकीय जिला पुस्तकालय पर न तो अफसर और न ही जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया। जिससे 12 साल में वहां न किताबें बचीं और न ही संसाधन। जिससे छात्र-छात्राओं का ज्ञान बढ़ाने वाला पुस्तकालय खंडहर में तब्दील हो गया।
बसपा सरकार में तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने 27 जुलाई 2011 को औराई के दरथुवां गांव में 20 लाख की लागत से बने राजकीय जिला पुस्तकालय का लोकार्पण किया। वहां तमाम किताबें उपलब्ध कराई गईं और बैठने के भी अच्छी सुविधा की गई। कुछ महीने तक वहां सबकुछ ठीक चला। छात्र-छात्राएं भी पहुंचे, लेकिन धीरे-धीरे वहां की पुस्तकें, फर्नीचर, पंखे सब गायब हो गई। पुस्तकालय तक आने-जाने का मार्ग न होने से अधिक दिक्कत हुई। आलम यह है कि लोकार्पण के 12 साल बाद पुस्तकालय की खिड़कियां जहां टूट चुकी हैं। वहीं पूरा भवन खंडहर में बदल चुका है।
आसपास जंगली घास होने से यहां जल्दी कोई आता नहीं है। ग्रामीण रमेश कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के ध्यान न देने से पुस्तकालय बदहाल हो गया। नशेड़ियों ने भवन की खिड़की, दरवाजे आदि तोड़कर बेच दिए। जिला विद्यालय निरीक्षक विकायल भारती ने कहा कि राजकीय पुस्तकालय काफी पुराना है। पूर्व में किन कारणों से वहां दुर्व्यवस्था हुई। जल्द ही उसे दिखवाया जाएगा। अगर चलने लायक होगा तो उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी।