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15 का रजिस्ट्रेशन, संचालित हो रहे 100 कोचिंग सेंटर

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ज्ञानपुर। तमाम प्रयासों के बाद भी कोचिंग सेंटरों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 100 से अधिक कोचिंग सेंटर बगैर पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। विभागीय उदासीनता के चलते विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को आर्थिक चपत लग रही है। आलम यह है कि इन सेंटरों पर शौचालय, पेयजल और आग बुझाने जैसी जरूरी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं है। शासन ने बिना रजिस्ट्रेशन के कोचिंग सेंटरों के संचालन पर रोक लगा रखा है। बावजूद इसके विभागीय कार्रवाई करने के नाम पर कोरमपूर्ति की गई है, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। विभिन्न स्कूल-कॉलेजों में शिक्षण कार्य करने वाले अध्यापक कोचिंग संस्था खोल रखे हैं। छात्रों का कहना है कि शिक्षक कोचिग संस्था में पढ़ने के लिए बाध्य करते हैं। आरोप है कि पढ़ाई नहीं करने की दशा में प्रायोगिक, अर्धवार्षिक सहित वार्षिक परीक्षा में कम नंबर देने की बात कही जाती है। इसके चलते छात्र कोचिंग में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कोचिंग खोले शिक्षकों की ओर से विद्यालय की पढ़ाई में लापरवाही बरती जाती है। एक से दो कमरों में संचालित कोचिंग में न तो शौचालय की सुविधा है और न ही पेयजल की व्यवस्था। इससे पढ़ने के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अभिभावक इसको लेकर कई बार विद्यालय प्रबंधन से शिकायत भी कर चुके हैं। बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। इससे कोचिंग संस्था खोले शिक्षक निरंकुश होते जा रहे हैं। अभिभावक पीयूष कांत, सुनील पांडेय, सभाजीत यादव ने ऐसे कोचिंग सेंटरों को बंद करने की मांग की है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में मात्र 15 कोचिंग सेंटर पंजीकृत हैं जबकि संख्या काफी अधिक है।
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